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Friday, September 25, 2026

BIHAR:नाबालिग साली को भगाकर गर्भवती करने वाले जीजा को 20 साल की जेल, POCSO कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

मुंगेर News: नाबालिग साली को भगाकर गर्भवती करने वाले जीजा को 20 साल की जेल, POCSO कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

मुंगेर | KOSI LIVE

मुंगेर के टेटिया बंबर थाना कांड संख्या 11/2025 में पॉक्सो विशेष न्यायालय ने नाबालिग साली को बहला-फुसलाकर भगाने और उसे गर्भवती करने के मामले में आरोपी जीजा सौरभ कुमार साह को दोषी करार देते हुए 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश सह अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विमलेंदु कुमार की अदालत ने सुनाया।

अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रीतम कुमार वैश्य ने मामले की पैरवी की।

शादी के एक महीने बाद नाबालिग साली को लेकर फरार

अभियोजन के अनुसार आरोपी सौरभ कुमार साह झारखंड के गोड्डा का रहने वाला है। उसकी शादी 21 जुलाई 2024 को टेटिया बंबर थाना क्षेत्र की एक युवती से हुई थी। शादी के करीब एक महीने बाद वह अपनी पत्नी के साथ ससुराल आया और बाद में पत्नी को वहीं छोड़कर उसकी नाबालिग बहन को लेकर फरार हो गया।

काफी तलाश के बाद भी नाबालिग का पता नहीं चलने पर उसकी मां ने 15 जनवरी 2025 को टेटिया बंबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई।

मेडिकल जांच में सामने आई गर्भावस्था

एफआईआर के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी और नाबालिग को बरामद कर लिया। मुंगेर सदर अस्पताल में हुई मेडिकल जांच में पीड़िता करीब तीन महीने की गर्भवती पाई गई। इसके बाद पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी।

10 गवाहों की गवाही, लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्य बने निर्णायक

मामले की सुनवाई के दौरान 10 गवाहों की गवाही हुई और 13 दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए गए। हालांकि ट्रायल के दौरान पीड़िता, उसकी मां और आरोपी की पत्नी अपने पहले दिए गए बयानों से मुकर गईं और अदालत में आरोपी के खिलाफ आरोपों से इनकार कर दिया।

इसके बाद अभियोजन पक्ष ने एमटीपी रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट और डीएनए रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत कराने का आग्रह किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

डीएनए रिपोर्ट ने खोली सच्चाई

अदालत में पेश डीएनए जांच रिपोर्ट में यह साबित हुआ कि पीड़िता के गर्भ में पल रहे भ्रूण का जैविक पिता आरोपी सौरभ कुमार साह ही था। वैज्ञानिक साक्ष्यों को अहम आधार मानते हुए अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।

कोर्ट के आदेश पर कराया गया सुरक्षित गर्भपात

सुनवाई के दौरान पीड़िता ने गर्भपात की अनुमति के लिए अदालत में आवेदन दिया था। अदालत ने सिविल सर्जन को मेडिकल बोर्ड गठित कर स्वास्थ्य मानकों के अनुसार सुरक्षित गर्भपात कराने का निर्देश दिया, जिसके बाद चिकित्सकों की निगरानी में प्रक्रिया पूरी की गई।

अदालत का फैसला

सभी वैज्ञानिक साक्ष्यों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पॉक्सो विशेष न्यायालय ने आरोपी सौरभ कुमार साह को 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।