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Tuesday, September 29, 2026

सुपौल में आंगनबाड़ी केंद्रों से हर माह ₹2600 वसूली का आरोप: वायरल वीडियो से मचा बवाल, सेविका ने LS पर लगाए गंभीर आरोप

सुपौल में आंगनबाड़ी केंद्रों से हर माह ₹2600 वसूली का आरोप: वायरल वीडियो से मचा बवाल, सेविका ने LS पर लगाए गंभीर आरोप

सुपौल | कोशी लाइव

सुपौल जिले के छातापुर प्रखंड में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन और विभागीय पंजी पर हस्ताक्षर के नाम पर कथित रूप से हर माह राशि वसूली का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है। वीडियो में ICDS कार्यालय के अंदर एक लेडी सुपरवाइजर (LS) के साथ कुछ लोग रुपए गिनते और बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं।

आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-52 की सेविका ममता कुमारी ने आरोप लगाया है कि THR, राशि आवंटन, क्रय पंजी पर हस्ताक्षर और अन्य विभागीय कार्यों के नाम पर प्रत्येक केंद्र से हर माह तय राशि की मांग की जाती है। हालांकि, वायरल वीडियो और आरोपों की विभागीय स्तर पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सेविका का आरोप- हर केंद्र से मांगे जाते थे ₹2600

ममता कुमारी का कहना है कि प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र से हर माह ₹2600 देने की बात कही जाती थी। उनके अनुसार, उनसे भी क्रय पंजी पर हस्ताक्षर कराने के एवज में ₹2600 की मांग की गई थी।

उन्होंने बताया कि सुरक्षा के लिए उन्होंने बातचीत और रुपए के लेन-देन का वीडियो बना लिया था ताकि शिकायत के समय उनके पास प्रमाण रहे। उनका दावा है कि उन्होंने संबंधित LS को ₹2400 दिए थे। हालांकि, वीडियो में दिखाई दे रही रकम किस मद में दी गई और उसका वास्तविक उद्देश्य क्या था, इसका निर्णय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

वीडियो डिलीट करने का दबाव और धमकी का आरोप

सेविका ने आरोप लगाया कि वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें लगातार फोन कर वीडियो हटाने का दबाव बनाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि वीडियो नहीं हटाने पर चयनमुक्त कराने की धमकी दी गई।

उनका कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी उन पर दबाव बनाया गया। हालांकि, वीडियो डिलीट कराने की धमकी दिए जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।

LS पर मानसिक प्रताड़ना का भी आरोप

जिवछपुर पंचायत स्थित केंद्र संख्या-52 की सेविका ममता कुमारी ने संबंधित LS संगीता कुमारी के खिलाफ CDPO को लिखित आवेदन देकर मानसिक प्रताड़ना, दुर्व्यवहार और अनावश्यक दबाव बनाने का आरोप लगाया है।

उन्होंने निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि उनके कार्य में कोई कमी है तो विभागीय नियमों के तहत लिखित सूचना देकर सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए।

ममता ने एक वीडियो संदेश जारी कर अन्य सेविकाओं से भी अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की है।

LS ने आरोपों से किया इनकार

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए LS संगीता कुमारी ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो करीब चार महीने पुराना है और उसे रिश्वत लेने से जोड़ना गलत है।

उनके अनुसार, उनके पति की प्रतापगंज में दवा की दुकान है और सेविका कार्यालय में उधार के पैसे जमा करने आई थी। उनका कहना है कि वीडियो में दिख रहा लेन-देन उसी भुगतान से जुड़ा है।

हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं स्थानीय सूत्रों का कहना है कि संबंधित LS की पोस्टिंग करीब दो महीने पहले हुई थी। यदि यह जानकारी सही है तो वीडियो के चार महीने पुराना होने के दावे की जांच विभागीय रिकॉर्ड से करनी होगी।

वीडियो में क्या दिख रहा, इसकी जांच जरूरी

वायरल वीडियो में कार्यालय के भीतर रुपए गिने जाने और बातचीत का दृश्य दिखाई देता है। सेविका का दावा है कि रकम लेने के बाद उसे पर्स में रखा गया और उनके पति से केंद्र की संख्या पूछकर नोट की गई।

लेकिन केवल वीडियो के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि रकम रिश्वत के रूप में ही ली गई थी। वीडियो की तारीख, लेन-देन का उद्देश्य और उसमें मौजूद लोगों की भूमिका समेत सभी पहलुओं की जांच आवश्यक है।

CDPO बोलीं- जानकारी नहीं मिली

छातापुर की CDPO ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। फिलहाल विभाग की ओर से न तो वायरल वीडियो की पुष्टि की गई है और न ही सेविका के आरोपों पर कोई आधिकारिक कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।

जांच में इन सवालों के जवाब अहम

अब विभागीय जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि—

* वायरल वीडियो कब का है?

* वीडियो में दिख रहा लेन-देन किस उद्देश्य से हुआ?

* क्या वास्तव में THR और अन्य विभागीय कार्यों के नाम पर हर माह ₹2600 की मांग की जाती थी?

* सेविका से ली गई राशि का वास्तविक कारण क्या था?

* वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की भूमिका क्या है?

फिलहाल मामला आरोप-प्रत्यारोप के बीच है और पूरे प्रकरण की सच्चाई विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।