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Sunday, August 16, 2026

Hindu Temple:सहरसा का बाबा मटेश्वर धाम: स्वयंभू शिवलिंग की मान्यता, सावन में हजारों श्रद्धालु करते हैं जलाभिषेक

सहरसा का बाबा मटेश्वर धाम: स्वयंभू शिवलिंग की मान्यता, सावन में हजारों श्रद्धालु करते हैं जलाभिषेक

सहरसा। सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के काठो गांव स्थित बाबा मटेश्वर धाम महादेव मंदिर जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। वर्षों से यह मंदिर शिवभक्तों की आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय मान्यता है कि बाबा मटेश्वरनाथ के दरबार में सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। यही वजह है कि सहरसा के आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु यहां जलाभिषेक और पूजा के लिए पहुंचते हैं।

मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्तों को आध्यात्मिक और शांत वातावरण का अनुभव होता है। सुबह की आरती से लेकर शाम की पूजा तक मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा मटेश्वरनाथ की कृपा से क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

स्वयंभू शिवलिंग के प्रकट होने की मान्यता

बाबा मटेश्वर धाम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राचीनता और इससे जुड़ी लोकआस्था है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू स्वरूप में प्रकट हुआ था। इसके बाद से यहां भगवान शिव की पूजा-अर्चना का सिलसिला लगातार जारी है।

सावन के महीने में मंदिर में विशेष रौनक रहती है। श्रद्धालु गंगाजल लेकर बाबा का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। इस दौरान मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारों से गूंज उठता है।

सावन में हजारों शिवभक्त पहुंचते हैं

सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर बाबा मटेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मुंगेर जिले के छर्रापट्टी से भी सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगाजल लेकर बाबा के जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। पूरे सावन महीने यह सिलसिला जारी रहता है और हजारों शिवभक्त बाबा के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं।

महाशिवरात्रि पर मंदिर में विशेष आयोजन किए जाते हैं। कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से यहां दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की भी परंपरा है। इस दौरान सुबह से देर रात तक पूजा-पाठ, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का दौर चलता रहता है।

विशेष अवसरों पर मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा का विशेष शृंगार किया जाता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं।

मनोकामना पूरी होने पर चढ़ाते हैं बेलपत्र और धतूरा

बाबा मटेश्वरनाथ के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई भक्त मनोकामना पूरी होने के बाद मंदिर में विशेष पूजा करते हैं। श्रद्धालु बाबा को बेलपत्र, धतूरा और विशेष प्रसाद अर्पित करते हैं।

शाम की आरती के दौरान महिला और पुरुष श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में भागीदारी रहती है। भक्तों का विश्वास है कि बाबा मटेश्वरनाथ के दरबार में सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थना अवश्य स्वीकार होती है।

धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में बढ़ रही पहचान

बाबा मटेश्वर धाम अब धीरे-धीरे धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। यहां आने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना के साथ आसपास के ग्रामीण परिवेश और शांत आध्यात्मिक वातावरण का भी अनुभव करते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विकास के साथ यहां आने वाले भक्तों की संख्या भी बढ़ रही है। बाबा मटेश्वर धाम आज सहरसा की धार्मिक पहचान और शिवभक्तों की गहरी आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।