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Saturday, May 16, 2026

MADHEPURA:बीएनएमयू में UMIS विवाद पहुंचा पटना, मुख्यमंत्री ने मांगी रिपोर्ट

बीएनएमयू में UMIS विवाद पहुंचा पटना, मुख्यमंत्री ने मांगी रिपोर्ट

मधेपुरा: भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (बीएनएमयू) में UMIS को लेकर चल रहा विवाद अब मधेपुरा से पटना तक पहुंच गया है। कोसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के विधान पार्षद एवं बीएनएमयू सिंडिकेट सदस्य की शिकायत पर ने मामले में संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री सचिवालय के विशेष कार्य पदाधिकारी ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

एजेंसी और विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप

डॉ. संजीव कुमार सिंह ने आरोप लगाया है कि कुलाधिपति की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में राज्य सरकार और बिहार के सभी विश्वविद्यालयों को नामांकन, पंजीयन, परीक्षा, वेतन और पेंशन सहित सभी कार्य भारत सरकार के निशुल्क समर्थ पोर्टल के माध्यम से संचालित करने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद बीएनएमयू में इन निर्देशों की अनदेखी की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन और UMIS एजेंसी के गठजोड़ से करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता हो रही है। उनके अनुसार, समर्थ पोर्टल को प्रभावी ढंग से लागू नहीं होने देने के लिए जानबूझकर बाधाएं खड़ी की जा रही हैं।

नोडल पदाधिकारी को धमकी देने का आरोप

डॉ. सिंह ने कहा कि UMIS इंचार्ज द्वारा समर्थ पोर्टल के तत्कालीन नोडल पदाधिकारी शशिकांत कुमार को कथित रूप से धमकी दी गई थी। इसके बावजूद कार्रवाई करने के बजाय कुलसचिव ने शशिकांत कुमार का दंडात्मक तबादला कर दिया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पीड़ित शिक्षक के समर्थन में आवेदन देने पर सीनेट सदस्य डॉ. सुधांशु शेखर को भी प्रताड़ित किया गया। डॉ. सिंह के अनुसार, UMIS कंपनी विश्वविद्यालय के साथ हुए एग्रीमेंट के अनुरूप कार्य नहीं कर रही है।

17 मॉड्यूल की जगह केवल 3 पर काम

शिकायत में कहा गया है कि एजेंसी को 17 मॉड्यूल्स पर काम करना था, लेकिन वर्तमान में केवल तीन मॉड्यूल्स पर ही कार्य हो रहा है, वह भी संतोषजनक नहीं है। आरोप है कि कंपनी विश्वविद्यालय से उपकरण और अन्य मदों में लाखों रुपये की राशि ले रही है, जबकि छात्र-छात्राओं का डाटा भी सुरक्षित नहीं है।

डॉ. सिंह ने बताया कि सिंडिकेट के निर्णय के अनुसार UMIS एजेंसी के साथ एक वर्ष का करार किया गया था, जिसकी अवधि 19 अप्रैल 2025 को समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद एजेंसी से कार्य लिया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि UMIS के समानांतर CMIS के माध्यम से भी छात्रों से अवैध वसूली की जा रही है। उनके अनुसार, UMIS के नाम पर प्रति छात्र 248 रुपये तथा CMIS के नाम पर कॉलेज स्तर पर प्रति छात्र 100 रुपये अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं।