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Thursday, May 7, 2026

बिहार में केंद्र संचालन में गड़बड़ी, DPO ने लिया सख्त फैसला--आंगनबाड़ी सेविका चयनमुक्त

किशनगंज में आंगनबाड़ी सेविका चयनमुक्त, सरकारी योजनाओं में अनियमितता और लापरवाही का आरोप

बच्चों की कम उपस्थिति, अंडा वितरण में गड़बड़ी और अनुशासनहीनता पर विभागीय कार्रवाई

किशनगंज में सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों के हक मारने, आंगनबाड़ी केंद्र संचालन में अनियमितता, अनुशासनहीनता और कार्य के प्रति लापरवाही के गंभीर मामले में एक आंगनबाड़ी सेविका को चयनमुक्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई एसडीपीजीआरओ सह आईसीडीएस डीपीओ अंकिता सिंह द्वारा की गई है।

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यह कार्रवाई जिले के प्रखंड अंतर्गत तुलसिया पंचायत स्थित आंगनबाड़ी केंद्र कुम्हार टोली, केंद्र संख्या-110 की सेविका प्रेमलता देवी पर हुई है। डीपीओ अंकिता सिंह ने बताया कि यह निर्णय दिघलबैंक सीडीपीओ की अनुशंसा एवं समाज कल्याण विभाग, बिहार के निर्देश के आधार पर लिया गया।

निरीक्षण में मिली लगातार अनियमितताएं

डीपीओ के अनुसार सेविका के कार्यकाल के दौरान कई बार निरीक्षण में गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। 29 जनवरी 2026 को किए गए निरीक्षण में 40 नामांकित बच्चों के विरुद्ध केवल 8 बच्चे उपस्थित पाए गए थे। इस लापरवाही को लेकर विभाग द्वारा सेविका से 1,256 रुपये की वसूली की गई थी।

इसके पूर्व 24 नवंबर 2025 और 19 अगस्त 2025 को किए गए निरीक्षणों में आंगनबाड़ी केंद्र में एक भी बच्चा उपस्थित नहीं मिला था। इन मामलों में क्रमशः 320 रुपये और 795 रुपये की राशि की वसूली की गई थी।

बिना सूचना अनुपस्थित रहने का भी आरोप

विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि 7 अक्टूबर 2025 को तत्कालीन जिला प्रोग्राम पदाधिकारी द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान केंद्र पर केवल 12 बच्चों की उपस्थिति दर्ज की गई थी। इस मामले में सेविका से स्पष्टीकरण मांगा गया था।

वहीं 9 मार्च 2026 को महिला पर्यवेक्षिका द्वारा किए गए निरीक्षण में सेविका बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित पाई गई थीं, जिसे विभाग ने गंभीर अनुशासनहीनता माना।

अंडा वितरण नहीं करने की शिकायत भी सही पाई गई

आईसीडीएस निदेशालय, बिहार से प्राप्त जन शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 8 मार्च से 16 मार्च 2025 के बीच केंद्र में बच्चों को अंडा वितरण नहीं किया गया। शिकायत की जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद सेविका से 240 रुपये की वसूली की गई थी।

डीपीओ अंकिता सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा सभी मामलों में नियमानुसार कार्रवाई करते हुए सेविका को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया था। लगातार मिल रही शिकायतों और निरीक्षण रिपोर्ट में अनियमितता प्रमाणित होने के बाद चयनमुक्त करने की कार्रवाई की गई।