पुलवामा में तैनात CRPF इंस्पेक्टर मो. असलम को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई, गांव में उमड़ा जनसैलाब
मो. असलम को सोमवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। बक्सर जिले के केसठ गांव निवासी मो. असलम के निधन की खबर से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
57 वर्षीय मो. असलम स्वर्गीय लतीफ मियां के पुत्र थे और वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के अंकुर सेक्टर में सीआरपीएफ इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे। जनवरी महीने में अत्यधिक ठंड के कारण उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। पहले उनका इलाज जम्मू में कराया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर उन्हें दिल्ली के वेंकटेश्वर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां रविवार शाम उन्होंने अंतिम सांस ली।
तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर पहुंचा गांव
सोमवार को जब उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा केसठ गांव पहुंचा तो पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पत्नी पति का शव देखते ही बेहोश हो गईं, जबकि बच्चे लगातार बिलखते रहे।
गांव की गलियों में “भारत माता की जय” और “मो. असलम अमर रहें” के नारों से माहौल गूंज उठा। अंतिम दर्शन के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी।
राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक
गांव के कब्रिस्तान में सीआरपीएफ जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
शव के साथ पहुंचे 114 बटालियन के डिप्टी कमांडेंट अरविंद कुमार ने कहा कि मो. असलम ने देश सेवा करते हुए इलाज के क्रम में वीरगति प्राप्त की है। उन्होंने उन्हें कर्तव्यनिष्ठ, बहादुर और ईमानदार जवान बताते हुए कहा कि उनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी।
परिवार और गांव को छोड़ गए प्रेरणादायक विरासत
मो. असलम अपने पीछे पत्नी, तीन बेटे और तीन बेटियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी तीनों बेटियों की शादी हो चुकी है। दो बेटे बिहार पुलिस में कार्यरत हैं, जबकि एक बेटा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि मो. असलम ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ देश की सेवा की। उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा बना रहेगा और गांव हमेशा अपने इस वीर सपूत पर गर्व करेगा।