पूर्णिया में जमीन के नीचे चल रही थी मिनी गन फैक्ट्री: ऊपर पत्तल मशीन, तहखाने में बन रहे थे हथियार; 4 गिरफ्तार
पूर्णिया के धमदाहा थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बेहद चौंकाने वाले अवैध हथियार निर्माण रैकेट का खुलासा किया है। हरिपुर गांव में जमीन के नीचे बने गुप्त तहखाने में मिनी गन फैक्ट्री चलाई जा रही थी, जबकि ऊपर पत्तल बनाने की मशीन लगाकर लोगों को भ्रमित किया जा रहा था। संयुक्त छापेमारी में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार यह अवैध फैक्ट्री पिछले करीब दो महीनों से सक्रिय थी, जबकि इसकी तैयारी छह महीने से चल रही थी। मामले का मास्टरमाइंड मुंगेर निवासी सूरज कुमार बताया जा रहा है, जो पूर्णिया से हथियारों की सप्लाई दूसरे जिलों में करता था।
कोलकाता STF की सूचना पर हुई कार्रवाई
मामले का खुलासा तब हुआ जब कोलकाता में एक व्यक्ति हथियार के साथ पकड़ा गया। पूछताछ में उसने बताया कि हथियार पूर्णिया के धमदाहा इलाके से खरीदा गया था। इसके बाद कोलकाता एसटीएफ की टीम पूर्णिया पहुंची और स्थानीय पुलिस व बिहार एसटीएफ के साथ संयुक्त छापेमारी की गई।
छापेमारी के दौरान पुलिस को ऊपर पत्तल बनाने वाली मशीन की यूनिट दिखाई दी। शुरू में किसी को शक नहीं हुआ, लेकिन पास में बने एक गुप्त रास्ते से नीचे तहखाने में जाने पर पुलिस दंग रह गई। वहां बांस की सीढ़ी के जरिए नीचे उतरते ही हथियार बनाने का पूरा सेटअप मिला।
तहखाने से बरामद हुए हथियार और मशीनें
पुलिस ने तहखाने से 10 अर्द्धनिर्मित पिस्टल, 14 लोहे की प्लेट, लेथ मशीन, कटर मशीन समेत बड़ी मात्रा में हथियार निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए हैं। भारी सामान बाहर निकालने के लिए पुलिस को जेसीबी मशीन मंगानी पड़ी।
मुंगेर से जुड़ा है नेटवर्क
गिरफ्तार आरोपियों में मुंगेर निवासी मो. आफताब आलम और मो. अनवर के अलावा धमदाहा के मिट्ठू कुमार और गब्बर मंडल शामिल हैं। पुलिस के अनुसार मिट्ठू कुमार बाहर मजदूरी करता था और हाल ही में गांव लौटा था। आशंका जताई जा रही है कि उसे मोहरा बनाकर गांव में यह नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
जिस घर में फैक्ट्री चल रही थी, वह सुरेंद्र मंडल का बताया जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
पुलिस कर रही पूरे नेटवर्क की जांच
अली साबरी ने बताया कि ग्रामीणों को यही बताया गया था कि वहां पत्तल बनाने का काम होता है, इसलिए किसी को शक नहीं हुआ। गुप्त सूचना के बाद कई दिनों तक निगरानी की गई और फिर संयुक्त कार्रवाई में पूरे रैकेट का पर्दाफाश हुआ।
इस कार्रवाई में बिहार एसटीएफ, कोलकाता एसटीएफ और धमदाहा पुलिस की टीम शामिल थी। रविशंकर कुमार ने बताया कि पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि अब तक यहां कितने हथियार बनाए गए और किन जिलों में उनकी सप्लाई की गई।
वहीं संदीप गोल्डी ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही