कटिहार के आजमनगर स्कूल में ‘मटन पार्टी’ का बड़ा साइड इफेक्ट: 350 बच्चे 28 अप्रैल से स्कूल से दूर
कटिहार (आजमनगर): उत्क्रमित मध्य विद्यालय कुशहा में शिक्षकों की एक कथित “मटन पार्टी” अब पूरे इलाके में शिक्षा व्यवस्था पर भारी पड़ गई है। हालात यह हैं कि 28 अप्रैल से लेकर अब तक स्कूल के सभी करीब 350 छात्र पढ़ाई छोड़ घर पर बैठे हैं, जबकि शिक्षक रोज स्कूल आ रहे हैं, लेकिन कक्षाएं पूरी तरह सूनी पड़ी हैं।
क्या है पूरा मामला
मिली जानकारी के अनुसार, इसी स्कूल की 8वीं पास एक छात्रा का हाल ही में बाल विवाह हुआ था। शादी की खुशी में छात्रा के परिजनों ने स्कूल में पका हुआ मटन भेजा, जिसे शिक्षकों ने परिसर में ही पार्टी कर खाया।
इस घटना के बाद ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया और अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया।
ग्रामीणों का सख्त रुख
आलमपुर पंचायत के ग्रामीणों ने साफ कहा है कि
“जो शिक्षक बाल विवाह जैसे अपराध का जश्न मना सकते हैं, उनके साये में बच्चों का भविष्य सुरक्षित नहीं है।”
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग करते हुए अल्टीमेटम दिया है कि जब तक सभी शिक्षकों का सामूहिक तबादला नहीं होगा, बच्चे स्कूल नहीं जाएंगे।
चार शिक्षक निलंबित
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) रविरंजन ने जांच रिपोर्ट के आधार पर चार शिक्षकों पर कार्रवाई की है।
निलंबित शिक्षकों में शामिल हैं:
- मो. अंजार आलम (प्रखंड शिक्षक)
- खुशबक्त (विद्यालय अध्यापक)
- जीनत आरा (विशिष्ट शिक्षिका)
- मो. ओवेदूर रहमान (विशिष्ट शिक्षक)
बताया गया कि मो. अंजार आलम के खिलाफ संबंधित नियोजन इकाई को कड़ी कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है, जबकि अन्य तीन शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया है।
निलंबन अवधि में सभी का मुख्यालय बीईओ, बारसोई निर्धारित किया गया है।
नियमों का उल्लंघन, गंभीर कदाचार
प्रशासन के अनुसार, यह कृत्य सरकारी सेवक आचरण नियमावली का खुला उल्लंघन है।
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि:
- बाल विवाह जैसे अपराध को बढ़ावा देने जैसा कार्य किया गया
- शैक्षणिक समय का दुरुपयोग हुआ
- विद्यालय की गरिमा को ठेस पहुंची
इसे बिहार विद्यालय विशिष्ट शिक्षक नियमावली 2023 और संशोधित 2024 नियमावली के तहत गंभीर कदाचार माना गया है।
पढ़ाई शुरू कराना प्राथमिकता
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी रविरंजन ने कहा:
“बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक अपराध है। जांच के आधार पर चार शिक्षकों को निलंबित किया गया है। बच्चों की पढ़ाई जल्द शुरू कराना हमारी प्राथमिकता है।”
निष्कर्ष
मटन पार्टी विवाद अब सिर्फ एक स्कूल का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन गया है।
अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन कैसे अभिभावकों का भरोसा बहाल कर स्कूल में पढ़ाई फिर से शुरू कराता है।