झंझारपुर/मधेपुर। मधेपुर की प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) मरजीना खातून को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। विद्यालय परित्याग प्रमाण पत्र (एसएलसी) पर प्रतिहस्ताक्षर के बदले छात्रों से रिश्वत लेने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद शिक्षा विभाग ने इसे गंभीर कदाचार मानते हुए यह कार्रवाई की है। शिक्षा विभाग के प्रशासन निदेशक मनोरंजन कुमार ने 18 मई को निलंबन का आदेश जारी किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए 10 मई को डीईओ अक्षय कुमार पांडेय और मधेपुर के बीडीओ आलोक कुमार शर्मा ने संयुक्त रूप से मामले की स्थलीय जांच की थी। इस अधिकारियों ने पाया कि बीईओ निर्धारित सरकारी कार्यालय के बजाय अपने निजी आवास से कार्यालय का संचालन करती हैं। जांच में छात्रों से अवैध राशि वसूलने के आरोप की भी पुष्टि हुई। डीईओ ने जांच का प्रतिवेदन 10 मई को ही शिक्षा विभाग के प्रशासन निदेशक को भेज दिया था। इस रिपोर्ट के आधार पर बीईओ के खिलाफ कार्रवाई की गई है。
बिहार सरकारी सेवक नियमावली के तहत कार्रवाई
बीईओ मरजीना खातून के खिलाफ यह कार्रवाई बिहार सरकारी सेवक वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियमावली 2005 के नियम 9(1) के तहत की गई है। निलंबन की अवधि के दौरान उनका मुख्यालय क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक कार्यालय, दरभंगा निर्धारित किया गया है। विभागीय आदेश में कहा गया है कि बीईओ ने बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के सर्वथा विपरीत कार्य किया तथा अपने सरकारी दायित्वों के निर्वहन में गंभीर कदाचार के दोषी पाए गए।
8 मई को वायरल हुआ था रिश्वत का वीडियो
गौरतलब है कि बीते 8 मई की देर शाम सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था। इस वीडियो में टीसी पर हस्ताक्षर करने के एवज में छात्रों से 300 से 500 रुपये तक की अवैध वसूली किए जाने का मामला सामने आया था। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया था।