हेडलाइन:
मुंगेर में रिश्वतखोरी पर बड़ा एक्शन: 1.70 लाख लेते पेशकार मुकेश कुमार रंगे हाथ गिरफ्तार
पूरी खबर:
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) की टीम ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए मुंगेर प्रमंडल में तैनात एक प्रशाखा पदाधिकारी (पेशकार) को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
गुरुवार (02 अप्रैल 2026) को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की मुख्यालय टीम ने मुंगेर प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में छापेमारी कर मुकेश कुमार, प्रशाखा पदाधिकारी, विधि शाखा (पेशकार) को 1,70,000 रुपये रिश्वत लेते हुए धर दबोचा। यह गिरफ्तारी कार्यालय के विधि शाखा कक्ष के सामने की गई।
शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
इस मामले का खुलासा बेगूसराय जिले के साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र के पंचवीर निवासी नंदकिशोर प्रसाद सुमन की शिकायत के बाद हुआ। उन्होंने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना में आवेदन देकर आरोप लगाया था कि मुकेश कुमार एक जमीन विवाद मामले में फैसला प्रभावित करने के लिए रिश्वत की मांग कर रहे हैं।
जमीन विवाद से जुड़ा मामला
शिकायत के अनुसार, संबंधित मामला सरकारी जमीन (लगभग 3 कट्ठा 4 धूर) से जुड़ा था। इस जमीन पर स्वामित्व को लेकर डीसीएलआर, बलिया (बेगूसराय) के न्यायालय में वाद संख्या 27/2024-25 में फैसला पहले ही मो. जावेद के पक्ष में दिया जा चुका था।
इस फैसले के खिलाफ परिवादी ने बीएलडीआर अपील संख्या 38/2025 दायर की थी। आरोप है कि इस अपील में सरकार के पक्ष में निर्णय दिलाने के नाम पर पेशकार द्वारा 1.70 लाख रुपये की मांग की जा रही थी।
सत्यापन के बाद बिछाया जाल
निगरानी ब्यूरो ने शिकायत का सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने के आरोप सही पाए गए। इसके बाद निगरानी थाना कांड संख्या 38/26 (दिनांक 01.04.2026) दर्ज कर पुलिस उपाधीक्षक पवन कुमार के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल गठित किया गया।
रंगे हाथ गिरफ्तारी
पूर्व निर्धारित योजना के तहत टीम ने जाल बिछाया और गुरुवार को आरोपी को रिश्वत की रकम लेते ही पकड़ लिया। गिरफ्तारी के समय पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और कानूनी औपचारिकताएं भी पूरी की गईं।
आगे की कार्रवाई
गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है। इसके बाद उसे विशेष निगरानी न्यायालय, भागलपुर में पेश किया जाएगा। मामले में आगे की जांच जारी है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस भ्रष्टाचार के नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं।
निष्कर्ष:
इस कार्रवाई से एक बार फिर स्पष्ट हुआ है कि बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग सक्रिय है और रिश्वतखोर अधिकारियों पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है।