सुपौल समाहरणालय स्थित लहटन चौधरी सभागार में बुधवार को जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में अभियोजन पदाधिकारियों की अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में पुलिस अधीक्षक, सिविल सर्जन सहित सभी नवनियुक्त विशेष लोक अभियोजक, लोक अभियोजक, सहायक लोक अभियोजक एवं अन्य अभियोजन पदाधिकारी शामिल हुए।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने अभियोजन पदाधिकारीवार और न्यायालयवार लंबित वादों की विस्तार से समीक्षा की।
समीक्षा के क्रम में कई मामलों में अभियुक्तों को सजा नहीं दिला पाने पर डीएम ने गहरी नाराजगी जताई और संबंधित पदाधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।
लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी उन्होंने स्पष्ट कहा कि न्यायालय में अभियोजन पक्ष को मजबूती से रखने में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी ने लोक अभियोजकों द्वारा कार्य में शिथिलता बरतने और सजा सुनिश्चित कराने के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं करने पर भी असंतोष व्यक्त किया।
इस दौरान प्रभारी पदाधिकारी, जिला विधि शाखा को निर्देश दिया गया कि संबंधित अभियोजन पदाधिकारियों का मानदेय फिलहाल रोक दिया जाए।
साथ ही उनके द्वारा पिछले महीनों में किए गए कार्यों का विस्तृत समीक्षात्मक प्रतिवेदन तैयार कर विभाग को भेजने को कहा गया।
कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ, तो मानदेय रोका जाएगा डीएम ने सभी अभियोजन पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि वे न्यायालय में मामलों की प्रभावी पैरवी करें और वादों के शीघ्र निष्पादन के लिए अधिकतम प्रयास करें।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ तो न केवल मानदेय भुगतान रोका जाएगा, बल्कि संबंधित पदाधिकारियों की गतिविधियों की रिपोर्ट विभाग को भेजकर आगे की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।