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Monday, March 23, 2026

मधेपुरा में रिश्वतखोरी पर DIG की बड़ी कार्रवाई: श्रीनगर थानाध्यक्ष सस्पेंड, एएसआई पहले ही निलंबित; स्कॉर्पियो बंधक बनाने का आरोप

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मधेपुरा में रिश्वतखोरी पर बड़ी कार्रवाई: श्रीनगर थानाध्यक्ष सस्पेंड, एएसआई पहले ही निलंबित; स्कॉर्पियो बंधक बनाने का आरोप

कुमारखंड (मधेपुरा)। जिले के श्रीनगर थाना में रिश्वतखोरी और पीड़ित को ब्लैकमेल करने के गंभीर आरोपों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। श्रीनगर थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर राघवेंद्र नारायण को निलंबित कर दिया गया है। वहीं मिठाई पुलिस शिविर में पदस्थापित एसआई कृष्ण कुमार को नया थानाध्यक्ष बनाया गया है। यह कार्रवाई कोसी रेंज के डीआईजी कुमार आशीष के निर्देश पर हुई, जिससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

इस मामले में इससे पहले श्रीनगर थाना के एएसआई दिलीप कुमार मधुकर को भी निलंबित किया जा चुका है। जांच में सामने आया कि थानाध्यक्ष के खाते से 60 हजार रुपये का लेनदेन हुआ और उन्होंने एएसआई को संरक्षण देने के साथ विभाग को गुमराह करने का प्रयास किया।

घूस नहीं देने पर स्कॉर्पियो वाहन बना बंधक

थाना क्षेत्र के परमानंदपुर वार्ड संख्या पांच में सीलिंग जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच करीब एक वर्ष से विवाद चल रहा था। एक पक्ष से दिनेश राम व धर्मेंद्र राम, जबकि दूसरे पक्ष से अक्षय कुमार झा और उनके पुत्र संजीत कुमार झा शामिल थे।

करीब 10 माह पहले दिनेश राम ने एससी-एसटी एक्ट के तहत संजीत झा के खिलाफ आवेदन दिया था। आरोप है कि इस मामले को प्रभावित करने के लिए एएसआई दिलीप कुमार मधुकर ने अक्षय झा से एक लाख रुपये रिश्वत की मांग की। इस पर 50 हजार रुपये दिए गए, जबकि शेष राशि के लिए समय मांगा गया।

इसके बाद एएसआई ने संजीत झा से तीन-चार महीने के लिए स्कॉर्पियो वाहन मांग लिया। मजबूरी में वाहन दे दिया गया। आरोप है कि इस दौरान स्टाम्प पेपर पर जबरन हस्ताक्षर भी करवा लिए गए। समय पूरा होने के बाद जब वाहन वापस मांगा गया तो टालमटोल किया गया और बाद में देने से इनकार कर दिया गया।

ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर एसपी से लगाई गुहार

पीड़ित संजीत झा ने पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह को आवेदन देकर न्याय की मांग की। एसपी के निर्देश पर सदर एसडीपीओ ने जांच की, जिसमें एएसआई को दोषी पाया गया और उसे निलंबित कर दिया गया।

इसके बावजूद स्कॉर्पियो वाहन वापस नहीं किया गया और उसकी किस्त भी जमा नहीं की गई, जिससे फाइनेंस कंपनी ने रिकवरी नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद पीड़ित ने डीआईजी से शिकायत की।

जांच में थानाध्यक्ष भी दोषी पाए गए

डीआईजी कुमार आशीष ने मामले की जांच कराई, जिसमें थानाध्यक्ष राघवेंद्र नारायण की संलिप्तता सामने आई। उन पर एएसआई के कृत्यों को छुपाने, विभाग को गुमराह करने और 60 हजार रुपये के लेनदेन का आरोप साबित हुआ। इसके आधार पर उन्हें निलंबित कर दिया गया।

डीआईजी कुमार आशीष ने कहा कि शिकायत मिलने पर जांच कराई गई और रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।