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Sunday, February 1, 2026

SAHARSA:फर्जी इंटर सर्टिफिकेट पर नौकरी: सहरसा में तीन नियोजित शिक्षकों पर निगरानी का शिकंजा, FIR दर्ज

हेडलाइन:
फर्जी इंटर सर्टिफिकेट पर नौकरी: सहरसा में तीन नियोजित शिक्षकों पर निगरानी का शिकंजा, FIR दर्ज

खबर:
बिहार में फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी करने वालों के खिलाफ निगरानी विभाग की कार्रवाई तेज हो गई है। सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड में वर्षों से शिक्षक के रूप में कार्यरत तीन नियोजित शिक्षकों पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने केस दर्ज कराया है। जांच में खुलासा हुआ है कि इन शिक्षकों ने नौकरी पाने के लिए इंटरमीडिएट के फर्जी या छेड़छाड़ किए गए प्रमाण पत्र जमा किए थे।

पटना से मिले आदेश के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के निर्देश पर बलवाहाट थाना में तीनों शिक्षकों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह कार्रवाई पटना हाईकोर्ट के उस आदेश के तहत की जा रही जांच का हिस्सा है, जिसमें वर्ष 2006 से 2015 के बीच नियुक्त शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों की गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं।

जांच के दौरान निगरानी विभाग ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति से इंटरमीडिएट प्रमाण पत्रों का आधिकारिक सत्यापन कराया। बोर्ड की रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि शिक्षकों द्वारा नौकरी के समय जमा किए गए अंक पत्र और बोर्ड के मूल टेबुलेशन रजिस्टर में भारी अंतर है।

निगरानी जांच में सामने आया कि शिक्षिका कान्ति कुमारी ने आवेदन में इंटरमीडिएट में 600 अंक और प्रथम श्रेणी दर्शाई थी, जबकि बोर्ड रिकॉर्ड के अनुसार उनके वास्तविक अंक 595 थे। इसके अलावा रोल नंबर में भी हेराफेरी पाई गई।

इसी तरह शिक्षक राजेश ठाकुर ने आवेदन में 570 अंक और फर्स्ट डिवीजन का दावा किया था, जबकि सत्यापन में उनके असली अंक 565 पाए गए। वहीं शिक्षक मदन ठाकुर ने 568 अंक दर्शाए थे, लेकिन बोर्ड रिकॉर्ड में उनके वास्तविक अंक 564 दर्ज हैं। उनके मामले में ‘रिमार्क्स’ कॉलम और टेबुलेशन रजिस्टर में भी अंतर पाया गया है।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के पुलिस निरीक्षक के लिखित आवेदन पर बलवाहाट थाना में सुसंगत धाराओं के तहत तीनों शिक्षकों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

इस कार्रवाई के बाद सहरसा जिले में फर्जी या संशोधित दस्तावेजों के सहारे नौकरी करने वाले शिक्षकों के बीच हड़कंप मच गया है। निगरानी विभाग ने साफ कर दिया है कि प्रमाण पत्रों की जांच पूरी सख्ती से की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।