प्रतापगंज में शराब तस्करी की जांच करने गयी मद्य निषेध टीम पर हमला, महिला एएसआई घायल, 16 नामजद समेत 25 पर केस
सुपौल/प्रतापगंज। थाना क्षेत्र के श्रीपुर पंचायत स्थित वार्ड संख्या 11 सरदार टोला में बुधवार की रात शराब बिक्री की सूचना पर जांच करने गयी मद्य निषेध विभाग की टीम पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया। इस घटना में महिला एएसआई अंजली कुमारी जख्मी हो गईं, जिनका इलाज रेफरल अस्पताल सिमराही में कराया गया। हमले के दौरान पुलिस वाहन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
मद्य निषेध अवर निरीक्षक संजय कुमार सिंह ने प्रतापगंज थाना में आवेदन देकर 16 नामजद और 10-12 अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई है।
गुप्त सूचना पर पहुंची थी टीम
अवर निरीक्षक संजय कुमार सिंह ने बताया कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी कि श्रीपुर वार्ड संख्या 11 निवासी योगेंद्र सरदार अपने घर से अवैध शराब बेचता है। सूचना की सत्यता जांचने जब टीम योगेंद्र सरदार के घर पहुंची तो वहां से दो व्यक्ति बाहर निकलने लगे। पूछताछ में उन्होंने अपना नाम योगेंद्र सरदार और दूसरा त्रिवेणीगंज निवासी रोहित कुमार बताया।
जब पुलिस ने घर की तलाशी लेने की बात कही तो दोनों उग्र हो गए और गाली-गलौज शुरू कर दी। इसी दौरान आसपास के 25–30 महिला-पुरुष लाठी, डंडा और लोहे की रॉड लेकर पहुंच गए और टीम पर हमला कर दिया। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस को पीछे हटना पड़ा, लेकिन ग्रामीणों ने ईंट-पत्थर से हमला जारी रखा, जिससे पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हो गया।
महिला एएसआई के साथ दुर्व्यवहार का आरोप
भागने के दौरान महिला एएसआई अंजली कुमारी को अज्ञात लोगों ने वाहन से खींच लिया और उनके साथ दुर्व्यवहार व मारपीट की, जिससे वे घायल हो गईं। इसके बाद घटना की सूचना वरीय अधिकारियों को दी गई। रात करीब 11 बजे भारी पुलिस बल के साथ छापेमारी कर योगेंद्र सरदार को हिरासत में लिया गया। उसकी निशानदेही पर छह अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है।
ग्रामीणों का अलग पक्ष
वहीं ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस रात करीब 11 बजे जबरन घरों में घुसी और निर्दोष महिला-पुरुषों के साथ मारपीट की। ग्रामीणों के अनुसार छापेमारी के दौरान योगेंद्र सरदार के घर का एक बच्चा डर के कारण बेहोश हो गया था। बच्चे की हालत देखकर उसकी मां चिल्लाने लगी, जिसके बाद पुलिस पीछे हटने लगी और ग्रामीणों ने भागती पुलिस को खदेड़ दिया। इसी क्रम में महिला एएसआई वाहन से गिर गई और घायल हो गईं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कुछ बच्चों ने ईंट-पत्थर से गाड़ी का शीशा तोड़ा। डर के कारण महिला एएसआई रेलवे फाटक के केबिन में जाकर छिप गई थीं, जिन्हें बाद में पुलिस अपने साथ ले गई।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दोनों पक्षों के आरोपों की सत्यता की पड़ताल की जा रही है। आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्ष पर निर्भर करेगी।