बिहारीगंज प्रखंड कार्यालय में भ्रष्टाचार का चेहरा: जन्म प्रमाण पत्र के नाम पर बुजुर्ग महिला से वसूली, छह माह से भटक रही फरियादी
मधेपुरा/बिहारीगंज। प्रखंड कार्यालय में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका उदाहरण गुरुवार को तब सामने आया जब एक बुजुर्ग महिला अपनी गोद में पोती को लेकर न्याय की गुहार लगाती नजर आई। मोहनपुर पंचायत के पत्नी टोला (वार्ड संख्या आठ) निवासी स्वर्गीय पुरन राम की पत्नी उमा देवी ने एक प्रखंड कर्मी पर जन्म प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर अवैध वसूली और प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाया है।
पैसे लेकर भी छह महीने से टालमटोल
पीड़िता उमा देवी ने बताया कि उनकी पोती एक वर्ष की हो चुकी है। करीब छह महीने पहले वे जन्म प्रमाण पत्र बनवाने प्रखंड कार्यालय आई थीं। वहां तैनात एक कर्मी ने कागजात जमा कराने के साथ ही प्रमाण पत्र निर्गत करने के एवज में एक हजार रुपये की मांग की। काम होने की उम्मीद में महिला ने रुपये दे दिए, लेकिन छह महीने बीत जाने के बाद भी प्रमाण पत्र नहीं मिला। हर बार कार्यालय आने पर यह कहकर लौटा दिया जाता है कि “साहब नहीं बैठे हैं, जब आएंगे तब बना देंगे।”
धूप में बैठी रही सास-बहू, नहीं पसीजा दिल
गुरुवार को दोपहर लगभग 12 बजे उमा देवी अपनी बहू और नन्हीं बच्ची के साथ प्रखंड कार्यालय परिसर के बाहर घंटों धूप में बैठी रहीं। पीड़िता का कहना है कि कर्मी कभी मोबाइल नंबर पास होने की बात करता है, तो कभी अगले दिन आने को कहकर टाल देता है। कार्यालय के लगातार चक्कर काटने से बुजुर्ग महिला थक चुकी है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
भ्रष्टाचार के साये में आम जनता
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रखंड कार्यालय में इस तरह की शिकायतें आम हो गई हैं, लेकिन कार्रवाई के अभाव में भ्रष्ट कर्मियों के हौसले बुलंद हैं। यदि इस मामले में कड़ी कार्रवाई होती है तो ऐसे बिचौलियों और रिश्वतखोर कर्मियों पर अंकुश लग सकेगा।
इस संबंध में बिहारीगंज के बीडीओ अमित कुमार ने कहा —
“मामला मेरे संज्ञान में आया है। जन्म प्रमाण पत्र के लिए पैसे लेना गंभीर मामला है। इसकी जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी कर्मी पाया जाएगा, उस पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी।”