बिहार सरकार ने राज्य की सरकारी जमीन को सुरक्षित करने और अवैध हस्तांतरण रोकने के लिए अहम कदम उठाया है। अब राज्य में जिन सरकारी जमीनों की पूर्व में जमाबंदी कर दी गई थी, उन्हें एक-एक कर रद्द करने की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव सीके अनिल ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, समाहर्ता और अपर समाहर्ताओं को निर्देश दिए हैं कि अवैध या संदिग्ध जमाबंदी के मामलों को 45 दिनों के भीतर निष्पादित किया जाए। इसमें वे मामलों को स्वतः संज्ञान में लेने या शिकायत/आवेदन प्राप्त होने पर कार्रवाई करेंगे।
अपर समाहर्ताओं की जिम्मेदारी
अपर समाहर्ता अब इस अभियान के दूसरे चरण में जिम्मेदार होंगे। उनका काम पूर्व में गलत, अवैध या संदिग्ध जमाबंदी को रद्द करना होगा। इसके लिए 1974 के बाद की हुई ऐसी जमाबंदी की निगरानी संबंधित अंचलाधिकारियों को करनी होगी।
सभी समाहर्ताओं को सतत निगरानी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इसका उद्देश्य है कि केडस्ट्रल और रिवीजनल सर्वे में दर्ज सरकारी जमीन सरकार या संबंधित विभाग के खाते में लौट सके। साथ ही, अंचल स्तर पर भूमि बैंक की स्थापना कर जमीनों के सही रिकॉर्ड बनाए जाएं।
कौन सी जमीनों पर होगी कार्रवाई
भारत सरकार के मंत्रालय या संस्थान से जुड़ी भूमि।
राज्य सरकार के किसी विभाग, बोर्ड या निगम से संबंधित जमीन।
जिला परिषद, नगर परिषद, नगर निगम, ग्राम पंचायत आदि के नाम पर दर्ज भूमि।
धार्मिक न्यास परिषद, वक्फ बोर्ड, सरकारी/अर्द्धसरकारी गोशाला आदि से संबंधित भूमि।
गैर मजरूआ आम और कैसराहिंद में दर्ज भूमि, जिसे सरकार ने विधि सम्मत पट्टा या बंदोबस्ती नहीं दी है।