राज्य ब्यूरो, पटना। Bihar News: बिना किसी आधार के दाखिल-खारिज के दावे को रोक कर रखना अब अंचलाधिकारियों पर भारी पड़ेगा।
उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शनिवार को कहा कि दाखिल-खारिज के मामले को बेमतलब लटका कर रखना गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा।
दोषी अंचलाधिकारियों पर कठोर कार्रवाई होगी। दाखिल-खारिज समय से नहीं होने के कारण रैयतों का भू-अभिलेख अद्यतन नहीं हो पाता, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण और अन्य वैधानिक सुविधाओं से वंचित होना पड़ता है।
सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को लिखा पत्र
इस संदर्भ में विभाग के सचिव जय सिंह ने जिलाधिकारियों को पत्र लिख कर कहा है कि वे सुनिश्चित करें कि दाखिल खारिज (Mutation) के आवेदनों का निबटारा बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम के अनुरूप हो रहा है या नहीं।
पत्र में कहा गया है कि आम-खास सूचना जारी होने के बाद 14 दिनों की अवधि में यदि कोई वैध आपत्ति प्राप्त नहीं होती है तो अंचलाधिकारी बिना के आदेश पारित किया जाना चाहिए।
अनावश्यक रूप से न डालें सुनवाई में
इसके विपरीत, कई मामलों में अंचल स्तर पर स्वयं ही आधारहीन स्वतः आपत्ति दर्ज कर वाद को अनावश्यक रूप से सुनवाई में डाल दिया जाता है। यह नियमों के विपरीत है।
पत्र में कहा गया है कि सरकारी खाता या खेसरा से संबंधित भूमि के मामलों में ही संतुष्टि के आधार पर स्वतः आपत्ति दर्ज की जा सकती है।
अन्य मामलों में बिना ठोस कारण के स्वतः आपत्ति दर्ज करना कदाचार की श्रेणी में आएगा। साथ ही यदि किसी असामाजिक तत्व द्वारा बिना आधार या बिना किसी वैधानिक हित के आपत्ति दर्ज की जाती है, तो उनके विरुद्ध विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।