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Thursday, October 5, 2023

SUPAUL:तीन पुलिस पदाधिकारियों पर 50हजार का जुर्माना:एक मामले में दो अलग FIR दर्ज कर दी, उज्बेकिस्तानी महिला से जुड़ा है मामला...जानें


आरोपी को सात साल की सजा सुनाई गई है।
सुपौल के वीरपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत इंडो-नेपाल सीमा पर अवैध रूप से भारतीय सीमा में प्रवेश करते हुए पकड़ी गई उज्बेकिस्तानी महिला के मामले में गुरूवार को जिला कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सप्तम अविनाश कुमार की कोर्ट ने एक आरोपी युवक को विदेशी महिला को झांसे में लेकर बिना आदेश के भारतीय सीमा में घुसपैठ कराने का दोषी पाया।

कोर्ट ने आईपीसी की धारा 370 और 120 बी के तहत सात साल कारावास और 25 हजार रुपए का अर्थदंड सुनाया है। जुर्माना की राशि नहीं देने पर दोषी युवक को एक महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही घटना की दो-दो प्राथमिकी दर्ज करने के लिए वीरपुर के तत्कालीन एसडीपीओ, वीरपुर थानाध्यक्ष और केस के अनुसंधानकर्ता को 50-50 हजार रुपए का जुर्माना सुनाया है।

उज्बेकिस्तानी महिला ऐनापेटा पेंको 28 मार्च 2021 को 90 दिनों की टूरिस्ट वीजा पर नेपाल आई थी। वीजा 5 जून 2021 को समाप्त हाे रहा था। इसी बीच अररिया के घूरणा थाना क्षेत्र अंतर्गत महेश पट्टी वार्ड 10 निवासी कृष्ण कुमार से महिला का संपर्क हुआ। उज्बेकिस्तानी महिला को कृष्ण कुमार ने झांसे में लिया और 29 मार्च 2021 को अवैध रूप से भारतीय सीमा में प्रवेश करते हुए पकड़ा गया।

एसएसबी 56वीं बटालियन के तत्कालीन कंपनी डी के कमांडर जॉन लेथॉन के आवेदन पर 30 मार्च को वीरपुर थाना में उज्बेकिस्तानी महिला को पीड़ित और कृष्ण कुमार को मानव तस्करी का आरोपी बनाते हुए कांड संख्या- 104/21 किया गया। एसआई अमरनाथ कुमार के आवेदन पर फिर छह अप्रैल 2021 को उज्बेकिस्तानी महिला को ही अवैध रूप से भारतीय सीमा में घुसपैठ का आरोपी बनाते हुए कांड संख्या- 107/21 किया गया। हालांकि ट्रायल के दाैरान कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में कांड संख्या 107/21 को खारिज करते हुए आरोपी उज्बेकिस्तानी महिला को बरी कर दिया।

कोर्ट ने तीन पुलिस पदाधिकारियों पर लगाया जुर्माना

जब मामला कोर्ट पहुंचा तो पुलिस को फजीहत झेलनी पड़ी और एडीजे सप्तम की कोर्ट ने एक ही मामले में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज करने को लेकर वीरपुर के तत्कालीन एसडीपीओ सहित तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश कुमार और केस के अनुसंधानकर्ता एसआई अमरनाथ कुमार को 50-50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तीनों पुलिस अधिकारियों का कृत्य माफी योग्य नहीं है। लिहाजा तीनों को अपने वेतन से जुर्माना राशि का भुगतान करना होगा। जुर्माने की यह राशि 10 दिनों के अंदर उज्बेकिस्तान के दूतावास के माध्यम से पीड़ित महिला को भुगतान सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है। साथ ही कोर्ट ने मामले में बिहार के डीजीपी को उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाने को कहा है।

एक ही मामले में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज करने की वजह सहित तीनों पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच करने को कहा गया है। अपर लोक अभियोजक रामजी प्रसाद ने बताया कि केस के ट्रायल के दौरान कोर्ट में अभियोजन की ओर से कुल आठ गवाह प्रस्तुत किए गए। वहीं बचाव पक्ष की ओर वकील विनोद कांत झा एवं शरद कुमार ने बहस में हिस्सा लिया।