17 रुपए किलो की दर से अरवा चावल खरीद कर कारोबारी दिल्ली, हरियाणा के मिलों को बेच रहे।
यही चावल नए पैक में रिफाइंड कर खुले बाजार में ऊंची कीमत में हो रही बिक्री
kosilive saharsa news:
जिले में सरकार का खाद्यान्न योजना लाभुकों ही नहीं कारोबारियों के लिए भी जबर्दस्त फायदे का सौदा साबित हो रहा है। केंद्र सरकार ने जब से मुफ्त खाद्यान्न योजना शुरू की तभी से ही इसकी हर स्तर पर लूट हो रही है। सरकार ने यह सोच कर डीलरों के माध्यम से जरूरतमंदों के लिए मुफ्त में चावल वितरण की योजना दो साल पहले शुरू की थी कि कोई अन्न के बगैर भूखा न रहे। मुफ्त चावल योजना का राजनीतिक फयदे के लिए सत्तारूढ़ पार्टियों ने जमकर प्रचार प्रसार भी किया। अब लाभुकों के पास पर्याप्त खाद्यान्न जमा हो जाने से इसकी खुलेआम बिक्री होने लगी है। डीलर प्वाइंट से ही लाभुक चावल लेकर पहले से वहां तराजू और बोरा लेकर तैयार व्यापारी के हाथों खुलेआम बेच दे रहे हैं। व्यापारी गांव-गांव से अधिकांश लाभुकों से चावल खरीद कर फिर ट्रक में लोड कर इसे बड़े गल्ला व्यवसायी के यहां बेच देते। इसके बाद वहां से चावल हरियाणा , दिल्ली सहित अन्य प्रांतों के मिलों तक पहुंचा दिया जाता है। दैनिक भास्कर ने सरकारी खाद्यान्न योजना के तहत मिलने वाले चावल की खरीद बिक्री की पड़ताल की तो कई चौकाने वाला तथ्य सामने आया। ऐसे ही व्यापारी से डीलर भी आवंटित खाद्यान्न बेच देता है। डीलर के पास वह चावल जमा हो जाता है जिसे एक -दो महीने पर लाभुकों का किसी महीने का खाद्यान्न बिना वितरण किए गायब कर दिया जाता।
स्थानीय स्तर पर अरवा चावल खरीद बिक्री की है त्रिस्तरीय व्यवस्था
मुफ्त का अरवा चावल खरीद-बिक्री की स्थानीय स्तर पर त्रिस्तरीय व्यवस्था है। प्रथम स्तर पर व्यापारी गांव-गांव घुमकर अरवा चावल के एवज में आधी मात्रा में उसना चावल लोगों को बदलकर लेते हैं। या डीलर के इर्दगिर्द बैठकर या घुमकर लोगों से 16-17 रुपए प्रति किलो की दर से अरवा चावल खरीदते हैं, जिसे वो बाजार में बकायदा गद्दी बनाकर बैठे छोटे व्यापारियों को 18-19 रुपये किलो बेच देते हैं।पुनः वहीं गद्दी व्यापारी उसे बड़े गल्ले व्यापारियों के हाथों 20-21 रुपये प्रति किलों की दर से बेच देता है। बड़ें व्यापारी उसी चावल को दिल्ली हरियाणा स्थित चावल मिलों को 22-23 रुपये किलो में बेचता है। स्थानीय एक व्यापारी ने बताया कि जिस तरह अपने राज्य के चावल मिल एसएफसी को चावल उपलब्ध करवाता है उसी तरह हरियाणा दिल्ली के चावल मिल द्वारा पुनः सरकार को वहीं चावल उपलब्ध करवा दिया जाता है। जो लौटकर पुनः राशनकार्डधारकों को मुफ्त प्राप्त हो जाता है। सरकार चावल मिलों से ऊंची कीमत में चावल खरीद कर मुफ्त में देश भर के लोगों के बीच बांटती है। दूसरा कारोबार यह है कि इसी चावल को फिर से पॉलिश कर लांग राईस का रूप दे रहै।
डीलर की दुकान के इर्द-गिर्द गल्ला व्यापारी
डीलरों की दुकानों के इर्द गिर्द ही अक्सर कोई न कोई गल्ला व्यापारी बकायदा तराजू बटखरा लेकर अनाज खरीदने के लिए बैठा रहता है।राशनकार्डधारक डीलर से मुफ्त में अरवा चावल प्राप्त कर अगल बगल बैठे गल्ला व्यापारी को सीधे बेच पैसे लेकर चलते बनते हैं। नगर पंचायत सोनवर्षा के वार्ड नं 10 में इसी तरह डीलर की दुकान के पास मौजूद व्यापारी लाभुकों से चावल लेकर बोरा में पैक करते हुए दिखा। सौ कदम की दूरी पर बैठा गल्ला व्यापारी कैमरा देखते ही भागने लगा।
उसना-अरवा चावल का औसत 40:60 है
विभागीय आंकड़ों के अनुसार अकेले सोनबर्षा क्षेत्र में प्रतिमाह करीब 9,063 हजार क्विंटल चावल का उठाव किया जाता है।जिसमें उसना और अरवा चावल का औसत 40:60 का रहता है। ऐसे में राशनकार्डधारकों के साथ ही डीलरों द्वारा भी करीब 4,500 हजार क्विंटल अरवा चावल खुले बाजार में बेच दिया जाता है।राशनकार्डधारक या डीलरों से 17 रुपये किलो सीधे खरिदगी का मूल्य जोड़ने पर वह करीब 76 लाख रुपये बनता है।
मुझे ऐसी जानकारी नहीं
इस तरह की जानकारी मुझे नहीं है। यदि ऐसे मामले कहीं से दिखेंगे तो कार्रवाई की जाएगी।
- मो दानिश रजा, एमओ