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Friday, May 19, 2023

MADHEPURA/न‌ई शिक्षा नीति में गरीब छात्रों को पढ़ाई से दूर करने का प्रयोग किया गया है, जो दुर्भाग्य की बात है : बजरंग

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मधेपुरा/न‌ई शिक्षा नीति में गरीब छात्रों को पढ़ाई से दूर करने का प्रयोग किया गया है, जो दुर्भाग्य की बात है : बजरंग  

न‌ई शिक्षा नीति में निम्न व मध्यम वर्ग के छात्रों को पढ़ाई से दूर करने का हर संभव कोशिश किया गया है। इसके मुताबिक जो स्नातक अब तक तीन वर्षों में होता था वो अब चार वर्ष में होगा जो छात्रों के लिए बेहद हीं दुर्भाग्य की बात है। इस पर बिहार सरकार को कड़े कदम उठाते हुए यहां के विश्वविद्यालय में रोक लगा देनी चाहिए क्योंकि यहां के छात्र स्नातक कर बिहार हीं नहीं देश के किसी भी हिस्से में प्रतियोगी परीक्षाओं में रोज एक न‌ई मुकाम हासिल कर रही। इससे ही बौखला केन्द्र सरकार यहां के छात्रों को विष समान ये 04 वर्षों वाला स्नातक के चक्कर में फंसाना चाह रहे जो एक प्रयोग है बिहार के छात्रों को सरकारी कार्यों में उच्च पदों पर जाने से रोकने का।
जब तीन वर्षों में छात्र स्नातक करते हैं तो बिहार व देश के क‌ई अन्य राज्यों में हर सत्र में देरी होने के कारण लगभग 04 वर्ष लग जाता है। यदि इसमें एक वर्ष और बढ़ा दिया जाता है तो 05 वर्ष लग जाएगा सिर्फ स्नातक करने में।
आप लोगों को भली-भांति पता है बिहार बोर्ड के छात्रों को 12वीं पास करने में कम से कम 18 वर्ष लगता है। वहीं सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड के छात्रों 12वीं पास करने में इससे कहीं ज्यादा ही समय लगता है। 
यहां बातें हम बिहार बोर्ड के छात्रों का हीं करेंगे क्योंकि ये छात्र अधिकतर निम्न वर्ग या मध्यम वर्ग से आते हैं। इनमें से अधिकतर छात्रों को 12वीं पास करने के बाद परिवार का आर्थिक स्थिति खराब रहने के वजह‌ से सर पर घर-परिवार, माता-पिता की जिम्मेदारियां भी आ जाती है, जिस वजह से कई छात्र आगे की पढ़ाई करने में असमर्थ हो जाते हैं। वे जल्द से जल्द किसी तरह अच्छे जॉब की तलाश में जैसे- बिहार दारोगा,‌ बीपीएससी, यूपीएससी, बैंक इत्यादि परीक्षाओं के लिए कम्पिटीशन की तैयारी में लग जाते साथ हीं साथ स्नातक भी करना होता है क्योंकि इन सभी परीक्षा में शामिल होने के स्नातक की डिग्रियां जरूरी है वैसे इसके अलावा भी आज के इस युग में स्नातक से नीचे कहीं भी आपको अच्छी जॉब नहीं मिलती।
वहीं खर्च को देखा जाए तो घर से बाहर रहकर स्नातक करने में एक वर्ष का खर्च कम से कम 150000 होता है। तीन वर्ष तक तो इतनी बड़ी राशि गरीब परिवार के बच्चे किसी तरह खर्च कर रहे और एक वर्ष बढ़ जाएगा तो क‌ई छात्र इस डर से पढ़ाई छोड़ देंगे।

लेकिन हमलोग छात्र हितों को देखते हुए इस पर रोक लगवाने का हर संभव कोशिश करेंगे इसमें आप सबों का साथ मिलने का पूरी उम्मीद है।