सुशांत के पिता केके सिंह के वकील विकास सिंह ने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत की जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट मुझे देखने को मिली है, उसमें टाइम ऑफ डेथ नहीं है, यानी कितने बजे सुशांत की मौत हुई इसका कोई जिक्र ही नहीं है। उनके मुताबिक टाइम ऑफ डेथ बहुत महत्वपूर्ण है, इसी से स्पष्ट हो सकता है कि उन्हें मार के लटकाया गया या लटककर मरे।
विकास सिंह ने कहा कि मुंबई पुलिस और कूपर हॉस्पिटल को इन सवालों का जवाब देना होगा। जब तक CBI इस मामले में नहीं जाएगी, मुझे नहीं लगता कि हम सच्चाई के आस-पास पहुंच पाएंगे। अगर विकास सिंह का आरोप सही है तो ये साफ होता है कि अस्पताल प्रशासन और मुंबई पुलिस कुछ न कुछ छिपाने की कोशिश कर रही है। इससे पहले विकास सिंह ने रिया चक्रवर्ती और सिद्धार्थ पिठानी पर गंभीर आरोप लगाए थे और सिद्धार्थ को शातिर अपराधी बताया था।
सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत को लेकर अब मुंबई पुलिस भी सवालों के घेरे में हैं। रोज ऐसे-ऐसे खुलासे हो रहे हैं, जिससे उसकी भूमिका पर प्रश्नचिन्ह लगते जा रहे हैं। शुक्रवार को ये खुलासा हुआ था कि सुशांत की मौत के बाद मुंबई पुलिस को उनका फोन फोरेंसिक जांच के लिए भेजने में 24 दिन लग गए। दावा यहां तक किया गया है कि पहले तो देरी से मिलने की वजह से फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम ने मोबाइल फोन जांच के लिए लेने से ही इनकार कर दिया था। बाद में पुलिस के बहुत ज्यादा मनाने के बाद उसे स्वीकार किया गया।
21 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत की सीबीआई जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 21 अगस्त तक टल गई है। इस जनहित याचिका को वकील अजय अग्रवाल ने दायर किया था। इस बारे में मीडिया से बात करते हुए सुशांत सिंह राजपूत के पिता के वकील विकास सिंह ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले में लंबी बहस सुनी है, मैं चाहता हूं कि कोर्ट कहे कि मामले की सीबीआई जांच सही है। कोर्ट को मुंबई पुलिस को आदेश देना चाहिए कि वो मामले में सीबीआई को सहयोग करें।
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