वाशिंगटन। आपने उल्कापिंडों के बारे में जरूर पढ़ा और सुना भी होगा। अकसर ये भी सुना होगा कि कोई उल्कापिंड धरती के पास आ रहा है। लेकिन ऐसा हर बार नहीं होता है। ये ब्रहृमांड की बेहद अनोखी घटनाओं में से एक होती है। 6 मई को लेकिन ऐसी ही एक घटना हुई थी जब पृथ्वी से महज 14 हजार किलोमीटर से एक उल्कापिंड निकल गया। ये उल्कापिंड फोर्ड ट्रांजिट वैन के आकार से बड़ा था। आपको बता दें कि ये अब तक का छठा ऐसा उल्कापिंड था जो पृथ्वी के इतने पास से गुजरा है।
दरअसल ब्रह्मांड में हजारों की संख्या में छोटे और बड़े आकार के चट्टाननुमा पत्थर चक्कर लगाते हैं जिनको उल्का या इंग्लिश में meteor कहते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इनका महत्व इसलिए भी काफी है क्योंकि इनसे ही ब्रह्मांड के दूसरे ग्रहों के बारे में जानकारी मिलती है। उल्कापिंडों का मुख्य वर्गीकरण उनके संगठन के आधार पर किया जाता है। इनमें से कुछ तो लोहा, निकल या मिश्रधातुओं से बने होते हैं और कुछ सिलिकेट खनिजों से बने पत्थर सदृश होते हैं। जो उल्काएं लोहे, निकल या मिश्रधातुओं को 'धात्विक' और सिलिकेट खनिजों से बने पत्थर को 'आश्मिक उल्कापिंड' कहते हैं।
जो उल्कापिंड धरती के इतने करीब से गुजर गया उसका नाम 2020JJ है। वैज्ञानिक मानते हैं कि ये खगौलिक मानकों के अनुसार यह बेहद छोटा था और इसलिए दूरबीन में नजर नहीं आया। वैज्ञानिक इसे तभी देख सके जब यह सीधे पृथ्वी के ऊपर आया। एरिजोना में स्थित माउंट लिमोन सर्वे से इसकी पहचान ठीक उस समय की गई जब यह पृथ्वी के ऊपर से निकल रहा था।
स्पेस साइंस राइटर डॉक्टर नतालिया स्टारकी के मुताबिक कम से कम एक किमी बड़े क्षुद्रग्रह को आसानी से देखा और पहचाना जा सकता है। लेकिन 2020JJ आकार में इससे छोटा था इसलिए इसको केवल तभी देखा जा सका जब ये पृथ्वी के ऊपर से गुजर रहा था। यह उल्कापिंड 1900 से लेकर अब तक पृथ्वी के सबसे नजदीक से गुजरे क्षुद्रग्रहों में छठवें स्थान पर था।
2004 के बाद से ही पृथ्वी के सबसे नजदीक से गुजरे 10 क्षुद्रग्रहों को अब तक रिकॉर्ड किया गया है। उच्च रिज्योलूशन टेलीस्कोप इमेजरी विकसित होने और खगोलिवदों की क्षमता में विस्तार होने के कारण यह महत्वपूर्ण घटनाएं दर्ज की जा सकी हैं। पृथ्वी के काफी नजदीक से गुजरने के बाद भी पृथ्वी और उस क्षुद्रग्रह के बीच में काफी दूरी थी।
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