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Wednesday, May 13, 2020

सहरसा।फिर कश्मीर की तर्ज पर नजर आएगा मत्स्यगंधा जलाशय


सहरसा। कभी श्मसान से मिनी कश्मीर और फिर जंगल-झुरमुट में तब्दील मत्स्यगंधा जलाशय की सूरत शीघ्र ही बदलने वाली है। इसके लिए जोर-शोर से कार्य चल रहा है। सात पोकलेन मशीन से युद्धस्तर पर जलाशय का उत्खनन किया जा रहा है। अगर सबकुछ ठीक- ठाक रहा तो इसी वर्ष दो दशक पूर्व की तरह सहरसा के लोग एकबार फिर मिनी कश्मीर का नजारा देखेंगे। लघु जल संसाधन विभाग से कार्य पूरा करने के लिए 15 जून तिथि निर्धारित किया है। उम्मीद की जा रही है इस वर्ष सहरसा समेत सम्पूर्ण कोसी के लिए एकबार फिर नौकायन का आनंद लेंगे।

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सात करोड़ 47 लाख की लागत से होगा झील का सौन्दर्यीकरण

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जल- जीवन हरियाली हरियाली योजना के तहत लघु जल संसाधन विभाग विभाग द्वारा डेढ़ किलोमीटर लंबी और दो सौ मीटर चौड़ी मत्स्यगंधा झील की के जीर्णोद्धार और सौन्दर्यीकरण के लिए ओरंगाबाद के मां मातेश्वरी कंस्ट्रक्शन कंपनी को सात करोड़ 47 लाख रूपये की लागत से इस झील को 15 जून तक काम पूरा करने का निर्देश दिया गया है।


छह लाख घनमीटर बढ़ जाएगी जलाशय की जलसंग्रहण क्षमता

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पूर्व जिलाधिकारी तेजनारायण लाल दास के प्रयास से मिनी कश्मीर के रूप में विख्यात यह जलाशय विगत कुछ वर्षों से उपेक्षा का शिकार रहा। वर्ष 2011 में सेवा यात्रा में आए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सहरसा के लोगों ने इसके जीर्णोद्धार का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने सहरसा के लोगों को इसे पुराने से भी बेहतर रूप में लाने का आश्वासन दिया था। सरकार ने इसके अनुरूप जल- जीवन- हरियाली योजना से इसका कार्य प्रारंभ किया। बीते दो वर्ष से पूरी तरह सूख चुकी इस झील की उड़ाही के क्रम में वर्तमान स्थिति से दो मीटर गहराई बढ़ाई जाएगी। गहराई बढ़ जाने से इस जलाशय की जलसंग्रहण क्षमता लगभग छह लाख घनमीटर बढ़ जाएगी। जीर्णोद्धार पूरा होने पर इस जलाशय में सालोभर पानी रहेगा। पुन: लोग दुधिया रोशनी में रंग- बिरंगे झड़ने के फव्वारे के बीच नौकायन का आनंद ले सकेंगे। इस लिए जोर- शोर से तैयारी चल रही है।

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मत्स्यगंधा जलाशय के के सौन्दर्यीकरण का कार्य जोर- शोर से चल रहा है। यह कार्य पूर्ण होने के साथ ही सहरसावासियों को एक रमणीक स्थल मिल जाएगा। 15 जून तक इसका निर्माण पूरा करने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। उम्मीद है कि तय सीमा के अंदर कार्य पूरा कर लिया जाएगा।

विष्णुदेव रजक

कार्यपालक अभियंता, लघु जल संसाधन विभाग, सहरसा।