@राजेश कुमार
इस समय विश्व के अधिकांश देश कोविड 19 के संक्रमण की मार झेल रहा है भारत भी अछूता नहीं है भारत सरकार ने इसके संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए लॉकडाउन फेज़ 3 के तहत सम्पूर्ण हिंदुस्तान को 17 मई तक पूर्णतः लॉकडाउन कर दिया है इसके साथ ही दिहाड़ी मजदूरों के सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है जिस पापी पेट की प्यास बुझाने अपने मासूम बच्चों और परिवार के साथ बंगाल के कुचविहार के फुलपुर गाँव से सैकड़ों मजदूर रोजगार की तालाश में बिहार के मधेपुरा जिला के शीपुर स्थित सीता ब्रिक्स (ईंट भट्ठा) पहुँचे थे,आज कोरोना बंदी ने इनके सामने भुखमरी की समस्या ला दी है।
कोरोनाबंदी इन मजदूरों के सामने किसी कहर से कम नहीं है ये सभी मजदूर बीबी,अपने मासूम बच्चे सहित बंगाल के कूचबिहार के फूलपुर गाँव से बिहार के मधेपुरा जिले के शीपुर स्थित सीता ब्रिक्स (ईंट भट्ठा) में ईंट निर्माण का कार्य करते थे. कोरोना के कारण देश में आई आपदा में इनलोगों के काम बंद हो गए. किसी तरह ये सभी मजदूर लॉकडाउन फेज़ 2 तक यहाँ समय गुजारा औऱ बाद में जब इनके सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई औऱ मालिक ने भी मदद करने से मना कर दिया तो ये लोग अपने परिवार औऱ मासूम बच्चों के साथ पैदल ही अपने गाँव बंगाल की ओर बुधवार को निकल पड़े.जो गुरुवार को दिन की उमस भड़ी कड़ी धूप में सुपौल के त्रिवेणीगंज पहुँचे.थोड़ी देर पेड़ के नीचे सुस्ताने के बाद ये सभी फ़िर पैदल हीं अपने गाँव की ओर निकल पड़े.पैदल यात्रा कर रहे मजदूरों की इस टोली में पुरूष, महिला औऱ बच्चे मिलाकर सौ से ज्यादा मजदूर थे। त्रिवेणीगंज थाना क्षेत्र के लतौना मिशन पहुँचे दर्जनों की टोली में शामिल मोहम्मद राशिद, मोहब्बत अकबर, मोहम्मद अनंबर, मोहम्मद रसूल, मोहम्मद राशिद, मोहम्मद नासिद, बेबी खातून, नूर जहां, बेबी रुखसाना आदि ने बताया कि हमलोग मधेपुरा के शीपुर से पैदल अपने गाँव बंगाल जाने के लिए बुधवार को सुबह निकले हैं औऱ आज यहाँ पहुँचे हैं जिस ईंट भट्ठे पर हमलोग काम करते थे उन्होंने हमलोगों को रखने से मना कर दिया।हमलोगों के सामने भुखमरी की स्थिति आ गयी जिसके बाद हमलोग पैदल ही अपने गांव निकल पड़े।
