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सहरसा। कोरोना वायरस का भय और अपनों की चिंता में लोग सैकड़ों किमी की दूरी ठेला और रिक्शा से तय करने लगे हैं। रविवार की अहले सुबह ठेला चलाकर खगड़िया और सहरसा के दो मजदूर सहरसा पहुंचे। प्रशासन ने दोनों को सहरसा स्टेडियम में रहने का इंतजाम किया गया।
दिल्ली के सदर बाजार में कारपेंटर का काम करने वाले जिले के सोनवर्षा राज थाना क्षेत्र के कोपा गांव के राजेश कुमार और खगड़िया जिले के बौरना गांव के छरपन यादव ने बताया कि लॉकडाउन के बाद दिल्ली में स्थिति भयावह हो गई थी। कोरोना का भय हर लोगों को सताने लगा। हमलोग 20 लोग एकसाथ काम करते हैं। जिनके ं परिवार था, वे दिल्ली में ही रुक गये और जो लोग अकेले थे। उनके पास घर लौटने का कोई साधन नहीं था। हमलोग सामान ढोने के लिए ठेला चलाते थे। उसी ठेले से गांव आने की योजना बनाई। गत 26 मार्च को वहां से ठेला पर छोटा गैस सिलेंडर, राशन आदि लेकर चले। दो-दो घंटे पर हमलोग ठेला चलाते थे। लगातार सफर के बाद 30 मार्च की अहले सुबह यहां पहुंच गये। दोनों मजदूर ने बताया कि यूपी में जब पहुंचे तो यूपी पुलिस के लोगों ने सहयोग किया। उनलोगों ने राशन भी उपलब्ध कराया। साथ ही स्क्रीनिग भी की। रास्ते में कुछ लोगों ने खाने-पीने का सामान दिया। हमलोग हर दिन करीब दो सौ से ढाई सौ किलोमीटर की यात्रा करते थे। रात होने पर भोजन खुद तैयार कर खाते थे। चिता में नींद आती ही नहीं थी। अगर नींद आ जाती थी तो वह सो जाता था और दूसरा ठेला चलाता था। दोनों मजदूरों के हौसले को देखकर प्रशासन ने उसे स्टेडियम में रहने का इंतजाम किया। जहां मेडिकल टीम द्वारा दोनों की स्क्रीनिग भी की गई। इससे पहले पांच मजदूर दिल्ली से जुगाड़ गाड़ी से सहरसा पहुंचे थे।
