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संतोष कुमार भगत।
सुपौल। अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा के तत्वावधान में मरौना प्रखंड अंतर्गत झिगवा ग्राम में सोमवार को जितेन्द्र यादव की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिसमें सर्वसम्मति से मृत्युभोज पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया। इतना ही नहीं 12 दिसंबर 2019 को हरि प्रसाद यादव के मां अलोघन देवी के मृत्यु उपरांत स्थानीय समाज के द्वारा भोज नहीं करने का निर्णय लिया गया। महासभा जिलाध्यक्ष डॉ. अमन कुमार ने कहा कि संसार जरूरत के नियमों के अनुसार चलता है। परिवर्तन ही संसार का नियम है। देश में समय और परिस्थितियों के अनुसार भारतीय संविधान में 126 बार संशोधन हो चुका है। उसी तरह वर्तमान समय में धार्मिक परम्परा में भी संशोधन करने की जरूरत है। मृत्युभोज प्रतिबंध को लेकर भी भारत सरकार को अतिशीघ्र कानून बनाना चाहिए। अपने परिवार को खोने का दुख और ऊपर से भारी-भरकम खर्च का कोई औचित्य नहीं है। इसका किसी भी धर्म ग्रंथ में उल्लेख नहीं है। इसके जगह पर जनहित का कार्य करना चाहिए। मृत्युभोज पर होने वाले खर्च को जीवित अवस्था में बुजुर्ग मां-बाप के ऊपर खर्च करना चाहिए। जिससे जीता-जागता देवता की दुआ के साथ-साथ समाज का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा। माता-पिता भक्त श्रवण कुमार की कथा सुनने के जगह साक्षात श्रवण कुमार का समाज को दर्शन व प्रेरणा मिलेगी। यादव महासभा के मुख्य संरक्षक प्रो. श्यामसुन्दर यादव ने कहा कि अमीर परिवार मृत्युभोज के जगह समाज के लिए एम्बुलेंस, सार्वजनिक पुस्तकालय, धर्मशाला, विवाह भवन, गाँव के बच्चा को पढ़ाने के लिए स्कूल बस और स्वच्छ, सुंदर, खुशहाल समाज बनाने में महत्वपूर्ण बनाने में योगदान दें। मध्यम और गरीब परिवार परिजन के स्मृति में पौधे लगाने का कार्य करें। इसी से भारत शिक्षित और विकसित राष्ट्र बनेगा। महासभा जिला संरक्षक सह प्रमुख प्रतिनिधि जितेन्द्र कुमार यादव ने कहा कि जब खिलाने वाला एवं खाने वाले का मन प्रसन्न हो, तभी भोजन करना चाहिए। जब दोनों दुखित हों तो कदापि भोजन नहीं करना चाहिए। जिला संगठन सचिव जयकृष्ण यादव ने कहा कि धार्मिक ²ष्टिकोण से भी मृत्युभोज करना उचित नहीं है। जिला उपाध्यक्ष मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि श्रेष्ठ मानव अपने साथी, सगे-संबंधी, आस-पड़ोस के मृत्यु पर विभिन्न प्रकार के पकवान व व्यंजन खाकर शोक मनाने का ढ़ोंग रचता है। इस पर गंभीरतापूर्वक विचार करने की जरूरत है। बैठक में बद्री प्रसाद यादव, श्रीप्रसाद यादव, देवनारायण प्रसाद यादव, जय कृष्ण यादव, सूरज नारायण यादव, झव्वर यादव, शोभाकांत यादव, शोभित लाल यादव, विजेंद्र कुमार विमल, बेचन यादव, श्यामसुंदर यादव, राजधर यादव, फुलेन्द्र यादव, श्रीकान्त राम, श्यामसुंदर ठाकुर, दुखीचंद यादव, रमेश यादव, लड्डूलाल यादव, सत्यनारायण भगत, झोली प्रसाद यादव, बिन्देश्वरी यादव, राजा राम यादव, चन्दर प्रसाद यादव, मु. सहाबुद्दीन, संजय यादव आदि उपस्थित थे।
संतोष कुमार भगत।
सुपौल। अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा के तत्वावधान में मरौना प्रखंड अंतर्गत झिगवा ग्राम में सोमवार को जितेन्द्र यादव की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिसमें सर्वसम्मति से मृत्युभोज पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया। इतना ही नहीं 12 दिसंबर 2019 को हरि प्रसाद यादव के मां अलोघन देवी के मृत्यु उपरांत स्थानीय समाज के द्वारा भोज नहीं करने का निर्णय लिया गया। महासभा जिलाध्यक्ष डॉ. अमन कुमार ने कहा कि संसार जरूरत के नियमों के अनुसार चलता है। परिवर्तन ही संसार का नियम है। देश में समय और परिस्थितियों के अनुसार भारतीय संविधान में 126 बार संशोधन हो चुका है। उसी तरह वर्तमान समय में धार्मिक परम्परा में भी संशोधन करने की जरूरत है। मृत्युभोज प्रतिबंध को लेकर भी भारत सरकार को अतिशीघ्र कानून बनाना चाहिए। अपने परिवार को खोने का दुख और ऊपर से भारी-भरकम खर्च का कोई औचित्य नहीं है। इसका किसी भी धर्म ग्रंथ में उल्लेख नहीं है। इसके जगह पर जनहित का कार्य करना चाहिए। मृत्युभोज पर होने वाले खर्च को जीवित अवस्था में बुजुर्ग मां-बाप के ऊपर खर्च करना चाहिए। जिससे जीता-जागता देवता की दुआ के साथ-साथ समाज का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा। माता-पिता भक्त श्रवण कुमार की कथा सुनने के जगह साक्षात श्रवण कुमार का समाज को दर्शन व प्रेरणा मिलेगी। यादव महासभा के मुख्य संरक्षक प्रो. श्यामसुन्दर यादव ने कहा कि अमीर परिवार मृत्युभोज के जगह समाज के लिए एम्बुलेंस, सार्वजनिक पुस्तकालय, धर्मशाला, विवाह भवन, गाँव के बच्चा को पढ़ाने के लिए स्कूल बस और स्वच्छ, सुंदर, खुशहाल समाज बनाने में महत्वपूर्ण बनाने में योगदान दें। मध्यम और गरीब परिवार परिजन के स्मृति में पौधे लगाने का कार्य करें। इसी से भारत शिक्षित और विकसित राष्ट्र बनेगा। महासभा जिला संरक्षक सह प्रमुख प्रतिनिधि जितेन्द्र कुमार यादव ने कहा कि जब खिलाने वाला एवं खाने वाले का मन प्रसन्न हो, तभी भोजन करना चाहिए। जब दोनों दुखित हों तो कदापि भोजन नहीं करना चाहिए। जिला संगठन सचिव जयकृष्ण यादव ने कहा कि धार्मिक ²ष्टिकोण से भी मृत्युभोज करना उचित नहीं है। जिला उपाध्यक्ष मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि श्रेष्ठ मानव अपने साथी, सगे-संबंधी, आस-पड़ोस के मृत्यु पर विभिन्न प्रकार के पकवान व व्यंजन खाकर शोक मनाने का ढ़ोंग रचता है। इस पर गंभीरतापूर्वक विचार करने की जरूरत है। बैठक में बद्री प्रसाद यादव, श्रीप्रसाद यादव, देवनारायण प्रसाद यादव, जय कृष्ण यादव, सूरज नारायण यादव, झव्वर यादव, शोभाकांत यादव, शोभित लाल यादव, विजेंद्र कुमार विमल, बेचन यादव, श्यामसुंदर यादव, राजधर यादव, फुलेन्द्र यादव, श्रीकान्त राम, श्यामसुंदर ठाकुर, दुखीचंद यादव, रमेश यादव, लड्डूलाल यादव, सत्यनारायण भगत, झोली प्रसाद यादव, बिन्देश्वरी यादव, राजा राम यादव, चन्दर प्रसाद यादव, मु. सहाबुद्दीन, संजय यादव आदि उपस्थित थे।
