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अच्छी खबर! बिहार में सहरसा के महिषी स्थित श्री उग्रतारा भारती मंडन संस्कृत महाविद्यालय को नैक से मान्यता मिल गई है। नैक ने कॉलेज की व्यवस्था को संतोषजनक बताते हुए सी ग्रेड प्रदान किया है।
महाविद्यालय को नैक से मान्यता मिलने पर कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा के कुलपति डॉ. सर्व नारायण झा सहित अन्य ने खुशी जताई है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अमरकांत झा ने कहा कि कुलपति के मार्गदर्शन में महाविद्यालय को नैक की मान्यता मिली है। नैक की तीन सदस्यीय टीम ने बीते 14 और 15 नवंबर को इस महाविद्यालय का निरीक्षण किया था। टीम में नैक बंगलुरु के डॉ. रमेशचंद्र पांडा, प्रो. भागीरथी नंदा और डॉ. हेतल मेहता थे।
टीम ने दो दिनों तक महाविद्यालय और हॉस्टल का निरीक्षण करते इंफ्रास्ट्रक्चर, पठन पाठन सहित कागजातों का गहन अध्ययन किया था। छात्रों और अभिभावकों से फीडबैक लिया था। उन्होंने कहा कि पांच साल के नैक से मान्यता मिलने के बाद महाविद्यालय का समुचित विकास होगा। हर साल नैक को महाविद्यालय से तमाम ब्योरा भेजा जाएगा। नैक से मान्यता मिलने पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अमरकांत झा, को-ऑर्डिनेटर प्रो. उपेन्द्र कुमार चौधरी, अंग्रेजी विभाग के प्राध्यापक डॉ. आशीष कुमार मल्लिक, डॉ. शिवलोचन झा, डॉ. शक्तिनाथ झा, जयप्रकाश ठाकुर, इंद्रदत्त झा, डॉ. निक्की प्रियदर्शी, डॉ. आनंद दत्त झा, अभिनव आनंद, विनोद, मनोज ने हर्ष जताया है।
49 साल पहले खुला था महाविद्याल
महिषी गांव में श्री उग्रतारा भारती मंडन संस्कृत महाविद्यालय 49 साल पहले खुला था। कॉलेज की स्थापना 5 मई 1970 को हुई थी। अभी कॉलेज एक मंजिला भवन में चल रहा है। यहां उप शास्त्री (इंटर) और शास्त्री (स्नातक) की पढ़ाई होती है।
49 साल पहले खुला था महाविद्याल
महिषी गांव में श्री उग्रतारा भारती मंडन संस्कृत महाविद्यालय 49 साल पहले खुला था। कॉलेज की स्थापना 5 मई 1970 को हुई थी। अभी कॉलेज एक मंजिला भवन में चल रहा है। यहां उप शास्त्री (इंटर) और शास्त्री (स्नातक) की पढ़ाई होती है।
