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इधर, सड़क दुर्घटना की बात करें तो सोमवार को बुलआहा पुल के समीप बस की ठोकर से एक महिला की मौत हो गई। सौरबाजार थाना क्षेत्र में दो दिन पहले बस की ठोकर से एक अधेड़ की मौत हो गई थी। जबकि तीन दिन पहले सिहौल के समीप साइकिल सवार एक युवक की मौत ट्रैक्टर की ठोकर से हो गई थी। इन सभी घटना के बाद मुआवजा व अन्य मांगों को लेकर सड़क जाम हो चुका है। थानाध्यक्ष का कहना है कि सड़क दुर्घटना में मौत होने के बाद प्रावधान के अनुसार मुआवजा दिया जाता है। इसके लिए हंगामा करने की जरूरत ही नहीं है।
सहरसा। नए परिवहन एक्ट लागू होने के बाद भी जिले में सड़क दुर्घटना में कमी नहीं आई है। पिछले पांच दिनों में चार लोगों की मौत वाहनों की ठोकर से हो चुकी है। हर दुर्घटना के बाद भीड़ उग्र हो जाती है और हंगामा भी होता है। लेकिन अगर मृतक के परिजन नहीं पहुंचते हैं तो शव को हाथ लगाने से भी भीड़ कतराती नजर आती है।
मंगलवार को कहरा कुटी के समीप सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत हो गई। मौत के बाद जमकर हो-हंगामा हुआ। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। बस में तोड़फोड़ भी किया गया। करीब तीन घंटे तक सड़क पर आवागमन बाधित रहा। लेकिन जब शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने हेतु उठाने की बारी आई तो लोग हाथ लगाने से भी कतराते दिखे। पुलिस के आग्रह पर भी कोई शव को हाथ नहीं लगा रहा था। जिसके बाद खुद थानाध्यक्ष राजमणि, एएसआइ अवनीश कुंवर व अन्य ने मृतक के शव को उठाया और वाहन पर रखा। हालांकि लोगों का भी कहना था कि शव को हाथ लगाने के बाद पुलिस के सवाल से बचने के लिए लोग छूने से कतराते हैं। वहीं थानाध्यक्ष का कहना है कि सड़क दुर्घटना होने के बाद लोग पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने में मदद करें ताकि सही समय पर इलाज हो सके।

