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मधेपुरा। थाना क्षेत्र के गोपालपुर पंचायत के दुर्गाबासा गांव के अपहृत आशीष राय हत्याकांड से पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल उठ खड़ा हुआ है। आखिर नामजद प्राथमिकी के बाद भी पुलिस का हाथ अपहर्ताओं तक क्यों नहीं पहुंच पाया। क्या नौ दिन का वक्त पुलिस के लिए कम रहा। जबकि शुरूआती दौर से परिजन युवक की हत्या का अंदेशा जताते रहा। पुलिस भले ही परिजनों के अंदेशा को नजर अंदाज किया। लेकिन वारदात सामने आने पर परिजनों का अंदेशा सही साबित हुआ। लोगों का कहना है कि काश पुलिस परिजनों की बातों पर ध्यान देते तो शायद आशीष की जान बच सकता था। युवक शव भवनंदपुरा नहर के पश्चिम जमुनिया बहियार के धार में पानी में डूबा मिला। अपहृत को पुलिस न तो जिदा और न ही मरे स्थिति में खोज पाया। गांव वालों ने अंदेशा के आधार पर शव को खोज निकाला। इस बात से भी लोगों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि पुलिस आखिर युवक को क्यों नहीं ढूंढ निकाला। गांव वाले सक्रिय नहीं होते तो शायद बुधवार को भी हकीकत का पता नहीं चल पाता। शव की पहचान होते ही परिजनों में कोहराम मच गया। घरवालों बेसुध हो गए। वहीं कुछ लोग दिलासा दिलाने में लगे रहे। गांव के लोगों में आक्रोश पनपने लगा है। लोगों के आक्रोश को देखते हुए शव स्थल पर बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और बलों को मंगाया गया। एसडीपीओ सीपी यादव खुद गतिविधि पर नजर बनाएं रखा। एसडीपीओ ने लोगो को कार्रवाई का भरोसा दिलाया। बहरहाल माहौल गमगीन और आक्रोश पूर्ण है।
मधेपुरा। उदाकिशुनगंज के गोपालपुर गांव के आशीष अहरणकांड के कारणों को लेकर चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि नौ अगस्त को आशीष अपहरणकांड के आरोपित पांडव यादव के बहन को कोई उठे ले गए। उसी शक में पांडव ने आशीष का पहले अपहरण किया। बाद में उसकी हत्या कर दी।अपहृत युवक के पिता सोनेलाल राय ने बताया कि गोपालपुर पंचायत के चकफजूला गांव के जनार्दन यादव की पुत्री नौ अगस्त को कहीं गुम हो गई। लड़की के परिजनों ने शक जाहिर किया था कि गायब करने में आशीष का हाथ है। उसी शक में उसके बेटे का अपहरण पांडव यादव ने किया। जबकि लड़की को गायब करने से उसके बेटे का कोई ताल्लुक नहीं रहा है।
मधेपुरा। थाना क्षेत्र के गोपालपुर पंचायत के दुर्गाबासा गांव के अपहृत आशीष राय हत्याकांड से पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल उठ खड़ा हुआ है। आखिर नामजद प्राथमिकी के बाद भी पुलिस का हाथ अपहर्ताओं तक क्यों नहीं पहुंच पाया। क्या नौ दिन का वक्त पुलिस के लिए कम रहा। जबकि शुरूआती दौर से परिजन युवक की हत्या का अंदेशा जताते रहा। पुलिस भले ही परिजनों के अंदेशा को नजर अंदाज किया। लेकिन वारदात सामने आने पर परिजनों का अंदेशा सही साबित हुआ। लोगों का कहना है कि काश पुलिस परिजनों की बातों पर ध्यान देते तो शायद आशीष की जान बच सकता था। युवक शव भवनंदपुरा नहर के पश्चिम जमुनिया बहियार के धार में पानी में डूबा मिला। अपहृत को पुलिस न तो जिदा और न ही मरे स्थिति में खोज पाया। गांव वालों ने अंदेशा के आधार पर शव को खोज निकाला। इस बात से भी लोगों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि पुलिस आखिर युवक को क्यों नहीं ढूंढ निकाला। गांव वाले सक्रिय नहीं होते तो शायद बुधवार को भी हकीकत का पता नहीं चल पाता। शव की पहचान होते ही परिजनों में कोहराम मच गया। घरवालों बेसुध हो गए। वहीं कुछ लोग दिलासा दिलाने में लगे रहे। गांव के लोगों में आक्रोश पनपने लगा है। लोगों के आक्रोश को देखते हुए शव स्थल पर बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और बलों को मंगाया गया। एसडीपीओ सीपी यादव खुद गतिविधि पर नजर बनाएं रखा। एसडीपीओ ने लोगो को कार्रवाई का भरोसा दिलाया। बहरहाल माहौल गमगीन और आक्रोश पूर्ण है।
बहन के गायब करने के शक में किया गया था अपहरण
मधेपुरा। उदाकिशुनगंज के गोपालपुर गांव के आशीष अहरणकांड के कारणों को लेकर चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि नौ अगस्त को आशीष अपहरणकांड के आरोपित पांडव यादव के बहन को कोई उठे ले गए। उसी शक में पांडव ने आशीष का पहले अपहरण किया। बाद में उसकी हत्या कर दी।अपहृत युवक के पिता सोनेलाल राय ने बताया कि गोपालपुर पंचायत के चकफजूला गांव के जनार्दन यादव की पुत्री नौ अगस्त को कहीं गुम हो गई। लड़की के परिजनों ने शक जाहिर किया था कि गायब करने में आशीष का हाथ है। उसी शक में उसके बेटे का अपहरण पांडव यादव ने किया। जबकि लड़की को गायब करने से उसके बेटे का कोई ताल्लुक नहीं रहा है।
