कोशी लाइव:अक्की
Happy Labour Day 2019: 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर हम आपको बता रहे हैं इससे जुड़ी कुछ जरूरी और महत्वपूर्ण बातें।
कोशी लाइव
अनिष कुमार संवाददाता बेलदौर खगड़िया
बताते चलें कि, दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में 1 मई को राष्ट्रीय छुट्टी होती है। अंतराष्ट्रीय तौर पर मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत 1 मई 1886 को हुई थी। लेकिन, भारत में इसकी शुरुआत 1923 से हुई। इस दिन को मनाने के पीछे उन मजदूर यूनियनों की हड़ताल है जो कि आठ घंटे से ज्यादा काम ना कराने के लिए की गई थी। इस हड़ताल के दौरान शिकागो के हेय मार्केट में बम ब्लास्ट हुआ था। इस स्थिति से निपटने के लिए पुलिस ने गोलियां चलाई, जिसमें सात मजदूरों की मौत हो गई थी।
इसके बाद साल 1889 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय महासभा की दूसरी बैठक में फ्रेंच क्रांति को याद करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव के तहत इसे अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाए जाने की बात कही गई। इतना ही नहीं इस प्रस्ताव के पास होते ही अमेरिका में सिर्फ 8 घंटे ही काम करने की इजाजत दे दी गई। बता दें कि, भारत में मजदूर दिवस सबसे पहले चेन्नई में 1 मई 1923 को मनाया गया था। चेन्नई के बाद धीरे-धीरे ये पूरे भारत में मनाया जाने लगा।
Happy Labour Day 2019: 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर हम आपको बता रहे हैं इससे जुड़ी कुछ जरूरी और महत्वपूर्ण बातें।
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अनिष कुमार संवाददाता बेलदौर खगड़िया
बताते चलें कि, दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में 1 मई को राष्ट्रीय छुट्टी होती है। अंतराष्ट्रीय तौर पर मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत 1 मई 1886 को हुई थी। लेकिन, भारत में इसकी शुरुआत 1923 से हुई। इस दिन को मनाने के पीछे उन मजदूर यूनियनों की हड़ताल है जो कि आठ घंटे से ज्यादा काम ना कराने के लिए की गई थी। इस हड़ताल के दौरान शिकागो के हेय मार्केट में बम ब्लास्ट हुआ था। इस स्थिति से निपटने के लिए पुलिस ने गोलियां चलाई, जिसमें सात मजदूरों की मौत हो गई थी।
इसके बाद साल 1889 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय महासभा की दूसरी बैठक में फ्रेंच क्रांति को याद करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव के तहत इसे अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाए जाने की बात कही गई। इतना ही नहीं इस प्रस्ताव के पास होते ही अमेरिका में सिर्फ 8 घंटे ही काम करने की इजाजत दे दी गई। बता दें कि, भारत में मजदूर दिवस सबसे पहले चेन्नई में 1 मई 1923 को मनाया गया था। चेन्नई के बाद धीरे-धीरे ये पूरे भारत में मनाया जाने लगा।

