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Saturday, February 16, 2019

MADHEPURA:डाकिनी मंदिर से झांप की चोरी

कोशी लाइव:अक्की

खुरहान के अति प्राचीन डाकिनी मंदिर के गर्भगृह से गुरुवार की रात मां को चढ़ाए गए झांप की चोरी हो गयी। चोरी गयी झांप की कीमत करोड़ों रुपये में आंका जा रहा है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस स्थल पर पहुंचकर छानबीन शुरू कर दी है। बताया गया कि मंदिर के गर्भगृह में जमीन के अंदर स्थापित मूर्ति के ऊपर अष्टधातु की दो झांप लगायी गयी थी। अज्ञात चोरों ने दोनों को उखाड़ लिया। जिसमें 10 साल पूर्व बनाए गए एक झांप को मंदिर परिसर में ही फेंक दिया और सदियों पूर्व समान मात्रा में बनाए गए अष्टधातु के पिंड स्वरूप झांप चुरा ले गये। चोरी गये झांप का वजन करीब साढ़े सात किलोग्राम बताया जा रहा है। बताया गया कि हर दिन की तरह ग्रामीण अहले सुबह जब माता के दर्शन और साफ-सफाई के उद्देश्य से वहां पहुंचे तो माता का झांप मंदिर परिसर में फेंका हुआ दिखा। मंदिर के गर्भगृह में जाने पर वहां लगाये गये झांप का क्षतिग्रस्त मिला। माता के झांप की चोरी होने की खबर पूरे गांव में फैल गयी। लोग बड़ी संख्या मंदिर में पहुंच गये। इस घटना से लोग आक्रोशित हो गये। घटना की जानकारी मिलते ही थानाध्यक्ष राजेश कुमार अन्य पदाधिकारियों के साथ वहां पहुंच गये पूरे मामले की जानकारी ली। मंदिर के पुजारी विनोदानंद झा उर्फ बौआ झा ने अज्ञात चोरों के विरुद्ध थाने में केस दर्ज कराया है। इस घटना से क्षेत्र के श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश की स्थिति बनी है। थानाध्यक्ष ने कहा कि इस घटना को गंभीरता से लेते हुए छानबीन की जा रही है। उन्होंने कहा कि कि जल्द ही चोरी की घटना का खुलासा हो जाएगा।

दस साल पहले भी झांप की हुई थी चोरी

खुरहान के डाकिनी मंदिर के गर्भगृह से दस साल पहले भी झांप की चोरी का प्रयास किया गया था। बताया गया कि 8 फरवरी 2009 की रात अज्ञात चोरों ने माता मंदिर के गर्भगृह में स्थापित अष्टधातु के झांप को उखाड़कर ले जाने का प्रयास किया था। लेकिन इसमें सफल नहीं हो पाया था। चोरों ने उखाड़े गए झांप को क्षतिग्रस्त कर दिया था। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने झांप की मरम्मत कराने के लिए कई स्वर्णकार से संपर्क भी किया, लेकिन स्वर्णकार झांप को पूर्व का आकार नहीं दे पाये। इसके बाद ग्रामीणों ने कोलकाता से एक बड़ा अष्टधातु का नया झांप बनवाया, जिसका वजन करीब 25 किलोग्राम बताया गया था। बनाए गए झांप को विद्वान पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ फिर से मंदिर में स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू गयी। इस मंदिर को फिर निशाना बनाया गया।