किशनगंज में सिपाही समीर कुमार की मौत पर उठे सवाल, पत्नी ने काम के दबाव को बताया वजह; FSL टीम कर रही जांच
डायल 112 में तैनाती के बाद परेशान रहने का परिजनों का दावा, सर्विस रिवॉल्वर से गोली लगने के बाद अस्पताल में हुई मौत; परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की
किशनगंज/भागलपुर। बिहार के किशनगंज में पुलिस लाइन में तैनात सिपाही समीर कुमार (32) की गोली लगने से मौत के मामले में कई सवाल उठ रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, रविवार सुबह करीब 8:15 बजे समीर को उनकी सर्विस रिवॉल्वर से गोली लगी। उन्हें किशनगंज सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। शुरुआती जानकारी में घटना को आत्महत्या बताया गया है, लेकिन परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
समीर की पत्नी पूजा कुमारी ने दावा किया है कि उनके पति डायल 112 में टाइपिंग का काम दिए जाने और ड्यूटी के दबाव से परेशान थे। वहीं, परिवार के कुछ अन्य सदस्यों ने पारिवारिक परिस्थितियों और घटना के समय को लेकर अलग-अलग बातें बताई हैं। समीर के साले ने सवाल उठाया है कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उन्होंने खुद को गोली मारी या किसी अन्य कारण से उनकी मौत हुई।
किशनगंज के पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है। घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम को भी जांच में लगाया गया है। फिलहाल, मौत की परिस्थितियों और इसके पीछे की वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पत्नी का दावा- डायल 112 में टाइपिंग का काम मिलने से परेशान थे समीर
समीर की पत्नी पूजा कुमारी ने बताया कि उनके पति सुबह करीब चार बजे अक्सर उन्हें फोन करते थे। रविवार को भी दोनों के बीच बातचीत हुई थी। पूजा के मुताबिक, उस दिन नवरात्रि का पहला दिन था और वह पूजा करने मंदिर जाने की तैयारी कर रही थीं। उन्होंने पति से करीब 15 मिनट तक बात की और फिर मंदिर जाने की बात कहकर फोन रख दिया।
पूजा ने बताया कि वह सुबह करीब छह बजे तक मंदिर में रहीं और सात बजे घर लौट आईं। इसके बाद घर के काम और बच्चों की देखभाल में व्यस्त हो गईं। उन्होंने सुबह करीब नौ बजे पति को फोन करने के बारे में सोचा था, लेकिन इससे पहले ही किशनगंज पुलिस लाइन से फोन आ गया। उन्हें बताया गया कि उनके पति की गोली लगने से मौत हो गई है।
पूजा का कहना है कि समीर पिछले कुछ समय से अपनी ड्यूटी को लेकर परेशान थे। अगस्त 2025 में किशनगंज में तैनाती के बाद उन्हें पुलिस लाइन में रखा गया था। बाद में उन्हें डायल 112 में जिम्मेदारी दी गई, जहां उन्हें टाइपिंग का काम करना पड़ रहा था।
पत्नी के मुताबिक, समीर फील्ड में काम करना चाहते थे, लेकिन उन्हें उनकी इच्छा के विपरीत काम दिया गया था। उनका दावा है कि काम के तनाव के कारण पति काफी परेशान रहते थे। हालांकि, केवल इस बयान के आधार पर मौत की वजह की पुष्टि नहीं की जा सकती।
चाचा ने बताया- पत्नी के इलाज को लेकर भी चिंतित रहते थे
समीर के चाचा गनौरी दास पूर्णिया जीआरपी में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि रविवार सुबह करीब नौ बजे किशनगंज पुलिस लाइन से उन्हें फोन आया था। शुरुआती सूचना में बताया गया कि बंदूक साफ करने के दौरान समीर को गोली लग गई है।
चाचा के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से समीर की तबीयत भी ठीक नहीं थी और उन्हें बुखार था। इसके अलावा उनकी पत्नी का सिलीगुड़ी में इलाज चल रहा था, जिसे लेकर वह चिंतित रहते थे।
हालांकि, गनौरी दास ने कहा कि पारिवारिक परेशानियों को उनकी मौत का कारण मान लेना उचित नहीं होगा। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना के समय वास्तव में क्या हुआ था।
साले ने उठाए सवाल, कहा- हर पहलू की हो जांच
समीर के साले प्रशांत ने भी घटना की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस को यह पता लगाना चाहिए कि समीर ने खुद को गोली मारी या घटना के पीछे कोई अन्य वजह थी।
परिजनों के मुताबिक, घटना से पहले समीर ने अपनी पत्नी से फोन पर बातचीत की थी। उनके चचेरे साले ने बताया कि बातचीत के दौरान समीर ने काम को लेकर तनाव में होने की बात कही थी और बाद में बात करने को कहा था।
परिवार की ओर से यह भी दावा किया गया कि इससे पहले समीर ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा काम को लेकर बार-बार टोके जाने और दबाव बनाए जाने की शिकायत की थी। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
परिजनों का कहना है कि घटनास्थल की जांच, फॉरेंसिक साक्ष्य, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और संबंधित लोगों के बयान सामने आने के बाद ही मौत की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।
साथी सिपाही ने बताई अलग कहानी
समीर के एक साथी सिपाही के अनुसार, वह देर रात खाना खाने के बाद सोने चले गए थे। सुबह उठने के बाद उनकी पत्नी से मोबाइल पर बातचीत हुई। साथी का दावा है कि बातचीत के दौरान दोनों के बीच कहासुनी हुई थी और इसी बीच समीर ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली।
साथी सिपाही ने यह भी बताया कि समीर पिछले दो-तीन दिनों से परेशान नजर आ रहे थे। उसके अनुसार, पति-पत्नी के बीच पिछले कुछ दिनों से विवाद चल रहा था।
हालांकि, यह साथी का बयान है। फोन पर हुई बातचीत की प्रकृति और घटना से उसके किसी संबंध की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही हो सकेगी। फिलहाल, अलग-अलग लोगों के बयानों में सामने आ रही परिस्थितियों के कारण मामले की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
पिता बोले- ड्यूटी के तनाव की बात बताते थे बेटा
समीर के पिता नागेश्वर दास सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। उन्होंने बताया कि उनका बेटा अक्सर ड्यूटी के दबाव और काम के बोझ को लेकर अपनी मां से बात करता था। परिवार का दावा है कि समीर काम को लेकर परेशान रहते थे।
समीर की असामयिक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके दो छोटे बच्चे हैं, जिनमें 12 साल की बेटी और आठ साल का बेटा शामिल हैं। घटना के बाद परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है।
परिजनों के मुताबिक, समीर की मौत की खबर मिलने के बाद वे किशनगंज पहुंचे। पुलिस लाइन में पत्नी के पहुंचने पर माहौल गमगीन हो गया। परिवार के लिए यह घटना बड़ा सदमा है।
एसपी बोले- FSL टीम कर रही जांच
किशनगंज के पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार ने बताया कि रविवार सुबह करीब 8:15 बजे सिपाही समीर कुमार को उनकी सर्विस रिवॉल्वर से गोली लगी थी। घटना के बाद उन्हें सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
एसपी के अनुसार, घटना से पहले समीर ने परिवार के सदस्यों से बातचीत की थी। पुलिस ने परिजनों को सूचना दे दी थी। मामले की जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब की टीम को भी लगाया गया है।
जांच में घटनास्थल की स्थिति, सर्विस रिवॉल्वर, गोली से जुड़े साक्ष्य, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और संबंधित लोगों के बयान महत्वपूर्ण होंगे। इसके साथ ही समीर की ड्यूटी और तैनाती से जुड़ी परिस्थितियों की भी पड़ताल की जा सकती है।
फिलहाल पुलिस की ओर से मौत की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने से पहले घटना के कारणों को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
2015 में हुई थी पहली पोस्टिंग, करीब छह महीने पहले डायल 112 में मिली थी जिम्मेदारी
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, समीर कुमार की पहली पोस्टिंग वर्ष 2015 में समस्तीपुर जिले में हुई थी। वर्ष 2022 में उनका स्थानांतरण मधुबनी किया गया, जहां वह 2025 तक तैनात रहे। अगस्त 2025 में उन्हें किशनगंज में पोस्टिंग मिली। शुरुआत में वह पुलिस लाइन में पदस्थापित थे। इसके बाद करीब छह महीने पहले उन्हें टाउन थाना के डायल 112 में तैनात किया गया था।
समीर और पूजा की शादी वर्ष 2011 में हुई थी। दोनों के दो बच्चे हैं। परिवार का आरोप है कि ड्यूटी का दबाव समीर को परेशान कर रहा था, जबकि पुलिस उनकी मौत से जुड़ी सभी परिस्थितियों की जांच कर रही है।
फिलहाल इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि समीर की मौत किन परिस्थितियों में हुई। पत्नी और पिता ने काम के दबाव की बात कही है, जबकि चाचा ने पारिवारिक परिस्थितियों का भी जिक्र किया है। दूसरी ओर, साले ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस जांच और फॉरेंसिक साक्ष्यों के सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।