बेगूसराय में फर्जी शिक्षक ससुराल से गिरफ्तार, मैट्रिक अंकपत्र पर बिहार बोर्ड ने लगाई ‘फेक’ की मुहर
पिता के नाम में अंतर से खुला फर्जीवाड़ा, निगरानी ब्यूरो की FIR पर पुलिस ने की कार्रवाई; दूसरा आरोपी शिक्षक अब भी फरार
बेगूसराय। बिहार में शिक्षकों के प्रमाणपत्रों में कथित फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मैट्रिक के अंकपत्र के सत्यापन में गड़बड़ी सामने आने के बाद आरोपी शिक्षक राजीव रंजन पांडेय को पुलिस ने उसकी ससुराल से गिरफ्तार कर लिया। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) के सत्यापन में उसके अंकपत्र पर पिता के नाम में अंतर पाया गया था। इसके बाद बोर्ड ने अंकपत्र पर ‘फेक’ की मुहर लगा दी।
गिरफ्तार शिक्षक राजीव रंजन पांडेय बेगूसराय जिले के मोहनपुर पंचायत स्थित नवसृजित प्राथमिक विद्यालय, साधुदेव सदा टोला में पदस्थापित था। वह समस्तीपुर जिले के पटोरी क्षेत्र के इनायतपुर निवासी लक्ष्मीकांत पांडेय का पुत्र है। बखरी पुलिस ने वीरपुर पुलिस के सहयोग से उसे वीरपुर क्षेत्र के पानापुर स्थित उसकी ससुराल से गिरफ्तार किया।
बखरी के इंस्पेक्टर सह थानाध्यक्ष अरविंद कुमार यादव के अनुसार, आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पूरी करते हुए उसे न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया की गई।
पिता के नाम में अंतर से पकड़ में आया फर्जीवाड़ा
मामले का खुलासा मैट्रिक के अंकपत्र के सत्यापन के दौरान हुआ। आरोपी राजीव रंजन पांडेय के मैट्रिक अंकपत्र पर उसके पिता का नाम लक्ष्मीकांत पांडेय दर्ज था। वहीं, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के रिकॉर्ड में पिता का नाम रामाकांत पांडेय मिला।
अंकपत्र और बोर्ड के रिकॉर्ड में पिता के नाम का अंतर सामने आने के बाद प्रमाणपत्र की वैधता पर सवाल उठे। सत्यापन के बाद बिहार बोर्ड ने अंकपत्र पर ‘फेक’ की मुहर लगा दी। इसी आधार पर शिक्षक के प्रमाणपत्रों में कथित गड़बड़ी का मामला निगरानी अन्वेषण ब्यूरो तक पहुंचा।
निगरानी ब्यूरो की शिकायत पर दर्ज हुई थी FIR
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के पुलिस अवर निरीक्षक राजेश प्रसाद की शिकायत पर 3 सितंबर 2026 को बखरी थाने में दो शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई शुरू की।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से राजीव रंजन पांडेय फरार चल रहा था। पुलिस ने उसकी तलाश करते हुए वीरपुर के पानापुर स्थित ससुराल से उसे गिरफ्तार कर लिया।
दूसरा आरोपी शिक्षक भी प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी के आरोप में वांछित
इस मामले में दूसरा आरोपी शिक्षक अपरजीत कुमार है। वह सहरसा जिले के महिषी क्षेत्र के सरौनी गांव का निवासी बताया गया है। वर्ष 2015 में नियोजित शिक्षक बने अपरजीत कुमार की वर्तमान तैनाती बेगूसराय के मोहनपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में बताई गई है।
आरोप है कि उसके बीईटीईटी प्रमाणपत्र और अंकपत्र में भी फर्जीवाड़ा किया गया है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
प्रमाणपत्रों के सत्यापन पर फिर उठे सवाल
शिक्षकों की नियुक्ति में शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मामले में मैट्रिक अंकपत्र पर दर्ज पिता के नाम और बिहार बोर्ड के रिकॉर्ड में अंतर मिलने के बाद कथित गड़बड़ी सामने आई। निगरानी ब्यूरो की शिकायत पर दर्ज मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरे आरोपी की तलाश जारी है।
नोट: मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।