सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार से मारपीट पर तेजस्वी यादव का हमला, बोले- सवाल पूछना हर किसी का अधिकार
सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार के साथ कथित मारपीट के मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। घटना को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि सवाल पूछना हर किसी का अधिकार है और किसी घटना के बाद जनता सवाल करेगी ही।
तेजस्वी यादव ने घटना को लेकर तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोगों को सिर्फ कुर्सी मिली है और वे आईने में खुद को देखते रहते हैं। उन्होंने कहा, “कभी थानेदार मारता है तो कभी डॉक्टर मारता है।” तेजस्वी ने मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
विधायक आईपी गुप्ता ने भी कार्रवाई की मांग की
सहरसा विधायक आईपी गुप्ता ने भी पत्रकार के साथ कथित मारपीट की घटना को गलत और अशोभनीय बताया। उन्होंने कहा कि अगर किसी पत्रकार की रिपोर्टिंग से किसी को परेशानी है तो उसकी शिकायत की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर पुलिस को भी बुलाया जा सकता है, लेकिन विवाद का रास्ता हाथापाई या मारपीट नहीं हो सकता।
आईपी गुप्ता ने कहा कि घटना में जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने पत्रकारों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर भी चिंता जताई और प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की।
RJD ने भी डॉक्टरों के व्यवहार पर उठाए सवाल
घटना को लेकर RJD की ओर से सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रिया दी गई। पार्टी ने अस्पताल की व्यवस्था और डॉक्टरों तथा स्वास्थ्यकर्मियों के व्यवहार को लेकर सवाल उठाए। RJD ने पत्रकार के साथ कथित तौर पर किए गए व्यवहार पर टिप्पणी करते हुए अस्पतालों में डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों के आचरण पर सवाल खड़े किए।
बीमार बच्चों की रिपोर्टिंग के लिए अस्पताल पहुंचे थे पत्रकार
पत्रकार की ओर से दिए गए आवेदन के अनुसार, वह मिड डे मील खाने के बाद बीमार हुए बच्चों की खबर की रिपोर्टिंग के लिए सहरसा सदर अस्पताल की इमरजेंसी सेवा में पहुंचे थे। बच्चों का वीडियो बनाने के बाद वह अस्पताल के बाहर बरामदे में खबर के लिए पीटीसी कर रहे थे।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि इसी दौरान अस्पताल प्रबंधन की ओर से डॉक्टरों से उनके खिलाफ शिकायत की गई।
दो डॉक्टरों पर गाली-गलौज और मारपीट का आरोप
पत्रकार के आवेदन में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल प्रबंधक सिंपी कुमारी ने अस्पताल प्रभारी डॉ. अजीत और डॉ. एसके आजाद से शिकायत की। इसके बाद दोनों चिकित्सकों पर कथित तौर पर गाली-गलौज और मारपीट करने का आरोप लगाया गया है।
पत्रकार ने आवेदन में जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
20-25 लोगों को बुलाने और ओटी ले जाने का भी आरोप
आवेदन के मुताबिक, डॉ. एसके आजाद और अन्य लोगों के उकसाने पर करीब 20 से 25 लोगों को बुलाया गया। इसके बाद पत्रकार के साथ मारपीट किए जाने का आरोप है।
आवेदन में यह भी कहा गया है कि पत्रकार को कथित तौर पर जबरन ओटी की तरफ ले जाया गया और एक कमरे में बंद कर दिया गया। वहां गला दबाने और शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर हमला करने का भी आरोप लगाया गया है।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक नेताओं और RJD की प्रतिक्रिया से मामला और गंभीर हो गया है। तेजस्वी यादव और विधायक आईपी गुप्ता ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अब पूरे मामले में प्रशासन की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजर है।
नोट: मारपीट से जुड़े आरोप आवेदन में लगाए गए हैं। आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान के बाद ही होगी।