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Tuesday, September 22, 2026

MADHEPURA:प्रसव के एक दिन बाद नवजात की मौत, अस्पताल में हंगामा: परिजनों ने लापरवाही का लगाया आरोप, प्रबंधन बोला- बिना डिस्चार्ज कराए घर ले गए थे

मधेपुरा में प्रसव के एक दिन बाद नवजात की मौत, अस्पताल में हंगामा: परिजनों ने लापरवाही का लगाया आरोप, प्रबंधन बोला- बिना डिस्चार्ज कराए घर ले गए थे

मधेपुरा/ग्वालपाड़ा। ग्वालपाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के एक दिन बाद नवजात बच्ची की मौत हो गई। बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्था और प्रसव के बाद मां एवं नवजात की देखभाल को लेकर सवाल उठाते हुए हंगामा किया। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों के आरोपों से अलग पक्ष रखते हुए कहा कि प्रसव के बाद परिजन बिना औपचारिक डिस्चार्ज कराए ही मां और नवजात को निजी वाहन से घर ले गए थे। अगले दिन बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल लाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

सुबह अस्पताल में भर्ती कराया था

कल्याणपट्टी वार्ड-11 निवासी पप्पू कुमार ने रविवार सुबह करीब 7 बजे अपनी पत्नी निशा कुमारी को प्रसव के लिए ग्वालपाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया था। परिजनों के अनुसार, करीब 10 बजे निशा कुमारी ने एक बच्ची को जन्म दिया। प्रसव के बाद नवजात को परिजनों के सामने रखा गया और उसे टीका भी लगाया गया था।

शाम को मां और नवजात को घर ले गए

परिजनों के मुताबिक, रविवार शाम करीब 5 बजे वे प्रसूता और नवजात बच्ची को लेकर घर चले गए। इसके बाद सोमवार दोपहर करीब 1 बजे बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजन आनन-फानन में बच्ची को लेकर दोबारा ग्वालपाड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे।

डॉक्टर ने जांच के बाद मृत घोषित किया

अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर ने नवजात की जांच की। जांच के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया गया। डॉक्टर के अनुसार, अस्पताल पहुंचने से पहले ही बच्ची की मौत हो चुकी थी।

डॉक्टर बोले- बिना डिस्चार्ज कराए घर ले गए थे

डॉक्टर प्रवेश कुमार प्रभाकर ने बताया कि निशा कुमारी को रविवार सुबह करीब 7 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था और करीब 10 बजे प्रसव हुआ। उनके अनुसार, प्रसव के बाद परिजन निजी वाहन से मां और नवजात को लेकर अस्पताल से चले गए थे।

डॉक्टर ने बताया कि सोमवार दोपहर करीब 12:30 से 1 बजे के बीच बच्ची को दोबारा अस्पताल लाया गया। जांच के दौरान बच्ची की मौत हो चुकी थी।

परिजनों ने पूछा- फिर घर जाने की अनुमति कैसे मिली?

नवजात की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि मां और नवजात को अस्पताल से औपचारिक रूप से डिस्चार्ज नहीं किया गया था, तो फिर उन्हें अस्पताल से घर जाने की अनुमति या सलाह कैसे दी गई।

इसी मुद्दे को लेकर परिजनों और अस्पताल कर्मियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया। परिजनों ने प्रसव के बाद मां और नवजात की निगरानी एवं देखभाल को लेकर भी सवाल उठाए।

अस्पताल परिसर में जुटे 20-25 लोग

घटना की जानकारी मिलने के बाद करीब 20 से 25 लोग अस्पताल परिसर में जमा हो गए। इस दौरान आशा कार्यकर्ता बबीता कुमारी और उनके पति राजीव कुमार से भी परिजनों की बहस हो गई। कुछ देर तक अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बनी रही।

अस्पताल प्रबंधन की ओर से कहा गया कि नवजात को प्रसव के बाद परिजन स्वयं अस्पताल से लेकर चले गए थे, जबकि परिजन अस्पताल की व्यवस्था और घर जाने की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठा रहे थे।

परिजन प्रसूता को लेकर घर लौटे

हंगामे के बाद परिजन प्रसूता को लेकर घर लौट गए। परिजनों का कहना है कि उनके साथ जो स्थिति बनी, ऐसी घटना भविष्य में किसी अन्य मरीज और उसके परिवार के साथ नहीं होनी चाहिए।

नवजात की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं

फिलहाल नवजात की मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि बच्ची को दोबारा अस्पताल लाए जाने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। वहीं, परिजन प्रसव के बाद मां और नवजात की देखभाल तथा अस्पताल से घर ले जाने की परिस्थितियों पर सवाल उठा रहे हैं।

मामले में नवजात की मौत की वजह और प्रसव के बाद मां-बच्ची को अस्पताल से घर ले जाने की पूरी परिस्थितियां जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी।