बेटी की खुशी नहीं मानी तो जिंदा रहते कर दिया अंतिम संस्कार: पूर्णिया में इंटरकास्ट लव मैरिज के बाद रिया को परिवार ने माना मृत, पुतले की निकाली शवयात्रा
पूर्णिया। पूर्णिया के नगर थाना क्षेत्र से इंटरकास्ट लव मैरिज का एक मामला सामने आया है, जिसने सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों को लेकर चर्चा छेड़ दी है। 18 वर्षीय रिया ने अपनी पसंद से पड़ोस में रहने वाले मिलन कुमार के साथ शादी कर ली। दोनों की जातियां अलग-अलग हैं। शादी से नाराज रिया के परिजनों ने उसे सामाजिक रूप से मृत घोषित करते हुए उसका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर दिया।
रिया के अनुसार, उसने 8 सितंबर को घर छोड़ा था। 12 सितंबर को उसने कोर्ट में मिलन कुमार से शादी की और 13 सितंबर को मंदिर में दोनों ने शादी की रस्में पूरी कीं। इसके बाद रिया ने अपने माता-पिता को फोन कर बताया कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है और वह अपने पति के साथ रहना चाहती है।
कोर्ट में रिया ने अपनी मर्जी से पति के साथ रहने की बात कही
बताया गया कि रिया के घर से चले जाने के बाद उसके पिता मनोज गोस्वामी ने मरंगा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने 12 सितंबर को रिया और मिलन को बरामद कर न्यायालय के समक्ष पेश किया।
न्यायालय में रिया का धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराया गया। रिया ने खुद को बालिग बताते हुए कहा कि वह अपनी इच्छा से मिलन कुमार के साथ रहना चाहती है और उसी के साथ जीवन बिताना चाहती है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों को साथ रहने की अनुमति मिल गई।
15 सितंबर को बेटी का पुतला बनाकर निकाली शवयात्रा
बेटी के इस फैसले से नाराज परिवार ने 15 सितंबर को रिया का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया। इसके लिए उसका पुतला तैयार किया गया। गांव में पुतले की तस्वीर के साथ शवयात्रा निकाली गई। ग्रामीणों के अनुसार, शवयात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और श्मशान घाट तक पुतले को ले जाया गया।
श्मशान घाट पर रिया के पिता ने पुतले को मुखाग्नि दी। इस दौरान अंतिम संस्कार से जुड़ी धार्मिक रस्में भी निभाई गईं। परिवार की ओर से इस पूरी प्रक्रिया के जरिए रिया को सामाजिक रूप से मृत घोषित करने की बात सामने आई।
17 सितंबर को श्राद्ध और ब्रह्मभोज का आयोजन
प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार के दो दिन बाद 17 सितंबर को परिवार की ओर से श्राद्ध संस्कार का आयोजन किया गया। इसके लिए पुरोहितों को बुलाया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कर्मकांड कराया गया।
परिवार के सदस्यों ने नाखून और बाल कटवाए तथा मुंडन संस्कार भी कराया। इसके बाद गंगाजल, तिल, कुश और जौ से पिंडदान की रस्म निभाई गई। रिश्तेदारों और परिचितों को भी कार्यक्रम में बुलाया गया। इसके बाद गांव और आसपास के लोगों के लिए ब्रह्मभोज का आयोजन किया गया।
रिया बोली- मेरे ही माता-पिता ने मेरा अंतिम संस्कार कर दिया
ससुराल पहुंचने के बाद रिया ने कहा कि परिवार की ओर से किया गया यह व्यवहार उसके लिए बेहद पीड़ादायक है। उसने कहा कि उसने अपनी जिंदगी का फैसला अपनी खुशी और भविष्य को ध्यान में रखकर किया है।
रिया का कहना है कि अगर माता-पिता बच्चों से उनकी पसंद के बारे में बात करें और उनकी बात समझने की कोशिश करें तो शायद ऐसी स्थिति पैदा नहीं होगी। उसके मुताबिक, कई बार जाति और समाज के दबाव के कारण बच्चे अपने परिवार से अपनी पसंद की बात कहने से डरते हैं।
रिया ने कहा कि अब उसके लिए उसके पति और ससुराल वाले ही उसका परिवार हैं।
रिया ने कहा- दूसरी जगह शादी करती तो दोनों की जिंदगी बर्बाद होती
रिया ने बताया कि वह ग्रेजुएशन की छात्रा है और उसने काफी सोच-समझकर मिलन के साथ शादी करने का फैसला लिया है। उसका कहना है कि यदि उसकी शादी उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी और से होती तो इससे उसकी और उस व्यक्ति की जिंदगी प्रभावित होती।
जाति को लेकर रिया ने कहा कि इंसान की पहचान जाति से नहीं बल्कि इंसानियत से होनी चाहिए।
पति मिलन बोला- समाज हमारा घर नहीं चलाएगा
रिया के पति मिलन कुमार ने कहा कि दोनों ने समाज को ध्यान में रखकर नहीं बल्कि अपनी खुशी के लिए शादी की है। दोनों एक-दूसरे के साथ खुश हैं और अपना जीवन साथ बिताना चाहते हैं।
मिलन का कहना है कि समाज उनके घर का खर्च नहीं उठाएगा और न ही उनकी जिंदगी चलाएगा। इसलिए शादी को लेकर समाज क्या सोचता है, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
अलग-अलग जातियों से हैं रिया और मिलन
बताया गया कि रिया ब्राह्मण परिवार से संबंध रखती है, जबकि मिलन कुमार पासवान समाज से आते हैं। दोनों के बीच करीब एक साल से प्रेम संबंध था। दोनों परिवारों के घरों के बीच लगभग दो किलोमीटर की दूरी बताई गई है और दोनों परिवारों के बीच पहले से परिचय भी रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, अलग-अलग जातियों से होने के कारण दोनों परिवार इस रिश्ते के पक्ष में नहीं थे। परिवार की असहमति के बावजूद रिया और मिलन ने साथ जीवन बिताने का फैसला किया और घर से निकलकर शादी कर ली।
कुछ ग्रामीणों ने नवविवाहित जोड़े का किया स्वागत
जहां परिवार की ओर से रिया का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया गया, वहीं गांव के कुछ लोगों ने रिया और मिलन के फैसले का स्वागत भी किया। दोनों को सम्मानित किया गया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।
ग्रामीणों ने नवविवाहित जोड़े को डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर भी भेंट की। घटना के बाद इलाके में यह मामला सामाजिक परंपरा, जातिगत सोच और युवाओं के अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने के अधिकार को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।