वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के 25 वर्षीय शिष्य की मौत, चौथी मंजिल से गिरने का CCTV सामने आया; पुलिस जांच में जुटी
मथुरा | कोशी लाइव
वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े आश्रम में रहने वाले 25 वर्षीय शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत से हड़कंप मच गया। शुक्रवार सुबह वह वाराह घाट इलाके में स्थित गुरु कृपा कुंज की चार मंजिला इमारत की चौथी मंजिल से नीचे गिर गए। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में घटनास्थल से जुड़े CCTV फुटेज में रसिक दुलारी शरण के बिल्डिंग से नीचे गिरने की बात सामने आई है। हालांकि, उन्होंने ऐसा कदम क्यों उठाया, इसे लेकर जांच जारी है।
कमरे से मिला ग्राइंडर, फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य
घटना के बाद पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया और फॉरेंसिक टीम को बुलाया। पुलिस के मुताबिक, कमरे से कुछ संदिग्ध सामान मिला है। एक ग्राइंडर पर खून के निशान मिलने की भी बात सामने आई है। रसिक के शरीर पर निजी अंग के पास चोट के निशान मिले हैं।
इन परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस घटना से पहले की पूरी स्थिति की जांच कर रही है। हालांकि, निजी अंग को लेकर सामने आई अन्य जानकारियों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सुबह करीब 11 बजे चौथी मंजिल पर गए थे
पुलिस के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे रसिक दुलारी शरण इमारत की चौथी मंजिल पर गए थे। कुछ देर वहां रहने के बाद वह नीचे गिर गए। बताया गया कि करीब आधे घंटे तक वह मौके पर पड़े रहे, जिसके बाद आश्रम से जुड़े लोगों की नजर पड़ी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल प्रबंधन की ओर से पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया।
मां और बहन शव देखकर फूट-फूटकर रोईं
घटना की जानकारी मिलने के बाद रसिक का परिवार मथुरा पहुंचा। पोस्टमॉर्टम हाउस में शव देखकर उनकी मां लौंग बाई और बहन रोने लगीं। मां ने आरोप लगाया कि दीक्षा लेने के बाद से उन्हें बेटे से मिलने में परेशानी होती थी।
परिवार का कहना है कि उन्होंने पहले भी वृंदावन आकर रसिक से मिलने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो पाई थी।
बहनोई का आरोप- आश्रम पहुंचने के बाद भी नहीं मिलने दिया
रसिक के बहनोई सोनू पटेल के अनुसार, घटना के बाद आश्रम की ओर से उन्हें फोन कर बताया गया कि रसिक छत से गिर गए हैं। परिवार शुक्रवार शाम करीब 5 बजे आश्रम पहुंचा, लेकिन उनके अनुसार रात तक उन्हें रसिक से मिलने नहीं दिया गया।
हालांकि, परिवार ने अभी यह स्पष्ट आरोप नहीं लगाया है कि रसिक की मौत किसी अन्य व्यक्ति के कारण हुई। बहनोई ने कहा कि उन्हें भी घटना की पूरी जानकारी नहीं है और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
दो साल पहले ली थी दीक्षा, बदल लिया था नाम
रसिक दुलारी शरण मूल रूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे। करीब दो साल पहले वह वृंदावन आए और संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली। दीक्षा के बाद उनका नाम दीपक लोधी से बदलकर रसिक दुलारी शरण रखा गया।
परिवार के अनुसार, वह दो भाई और एक बहन में बीच के थे। उनकी मां करीब एक साल पहले भी वृंदावन आई थीं। परिवार के मुताबिक, रसिक धार्मिक गतिविधियों से जुड़े रहते थे और नर्मदा परिक्रमा भी कर चुके थे।
आश्रम में बिजली का काम देखते थे
रसिक दुलारी को बिजली के काम का अनुभव था। इसी वजह से आश्रम में उन्हें बिजली के रखरखाव से जुड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। करीब तीन महीने पहले उन्हें गुरु कृपा कुंज की चौथी मंजिल पर रहने के लिए कमरा मिला था।
गुरु कृपा कुंज में प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े कई शिष्य और सेवादार रहते हैं।
मोबाइल फोन की भी जांच कर रही पुलिस
एसपी सिटी राजीव कुमार के अनुसार, परिवार की ओर से थाने में शिकायत दी गई है। परिवार ने रसिक से मुलाकात नहीं होने देने की बात कही है, जिसकी जांच की जा रही है।
सीओ संदीप सिंह ने बताया कि अस्पताल से सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची थी। घटनास्थल की जांच के साथ फॉरेंसिक टीम से भी साक्ष्य जुटाए गए हैं।
पुलिस अब रसिक के मोबाइल फोन और डेटा की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना से पहले उन्होंने किससे बातचीत की थी और उस समय उनकी परिस्थितियां क्या थीं।
पुलिस के सामने कई सवाल
पुलिस की जांच में फिलहाल यह स्पष्ट करना बाकी है कि रसिक दुलारी शरण ने आखिर ऐसा कदम क्यों उठाया। घटनास्थल से मिले सामान, CCTV फुटेज, मोबाइल डेटा और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को जांच का हिस्सा बनाया गया है।
परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की भी पुलिस जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच की जा रही है। वहीं, आश्रम की ओर से इस घटना को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
नोट: निजी अंग से जुड़ी चोट और ग्राइंडर संबंधी जानकारी को पुलिस/फॉरेंसिक जांच में सामने आए तथ्यों के रूप में ही देखा जा रहा है। इनसे जुड़ी परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।