दो दशक बाद भी फूस के भवन में पढ़ रहे बच्चे, 74 छात्रों के स्कूल को नहीं मिली पक्की इमारत
सुपौल/मरौना: निर्मली अनुमंडल के मरौना प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय महेशपुर में बच्चे आज भी फूस के भवन में पढ़ने को मजबूर हैं। वर्ष 2006 में स्थापित इस विद्यालय को करीब दो दशक बाद भी पक्का भवन और चारदीवारी नहीं मिल सकी है। बेलही पंचायत के वार्ड नंबर-7 में संचालित स्कूल में 74 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन उन्हें अब तक कई मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई हैं।
बांस-बल्ले के सहारे एक कमरे में पढ़ाई
विद्यालय की प्रधानाचार्य निर्मल कुमारी ने बताया कि कक्षा एक से पांच तक के बच्चों की पढ़ाई बांस-बल्ले के सहारे बनाए गए फूस के एक ही कमरे में होती है। विद्यालय में 74 बच्चों का नामांकन है, जिनमें 32 छात्र और 42 छात्राएं हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए पांच शिक्षक प्रतिनियुक्त हैं। मंगलवार को 64 बच्चे स्कूल पहुंचे थे।
नल-जल और बिजली की भी सुविधा नहीं
प्रधानाचार्य के अनुसार, विद्यालय में अब तक नल-जल और बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन भी जलावन के सहारे तैयार किया जाता है। फूस के भवन की स्थिति जर्जर और चिंताजनक है, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
चारदीवारी नहीं, परिसर में घूमते हैं जानवर
स्कूल परिसर में चारदीवारी नहीं होने के कारण कुत्ते, बिल्ली और अन्य जानवरों का आना-जाना लगा रहता है। विद्यालय के शौचालय की स्थिति भी खराब है। उसका दरवाजा अज्ञात लोगों ने तोड़ दिया है, जिससे बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने पक्के भवन की मांग उठाई
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय के लिए लंबे समय से पक्के भवन की आवश्यकता महसूस की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। उनका कहना है कि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर माहौल में पढ़ाई के लिए जल्द से जल्द विद्यालय का पक्का भवन बनाया जाना चाहिए।
वरीय अधिकारियों को भेजा गया पत्र
प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मरौना वीरेंद्र कुमार ने बताया कि विद्यालय की समस्याओं के संबंध में वरीय अधिकारियों को पत्राचार किया गया है। अधिकारियों के स्तर से आवश्यक कार्रवाई की उम्मीद है।