धमदाहा में 15 शहीदों के परिजनों का सम्मान, आंखों में छलके वीर सपूतों की याद के आंसू
पूर्णिया: भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान शहीद हुए पूर्णिया के 15 वीर सपूतों की याद में मंगलवार को धमदाहा शहीद स्मारक पर राजकीय समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान शहीदों के परिजनों को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। अपने वीर परिजनों की याद में शहीदों के परिवारजनों की आंखें नम हो गईं।
समारोह में बिहार सरकार की भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह, पूर्णिया के जिलाधिकारी अंशुल कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर वीर सपूतों को नमन किया।
1942 में अंग्रेजों ने बरसाई थीं गोलियां
मंत्री लेशी सिंह ने कहा कि धमदाहा स्वतंत्रता सेनानियों और वीर सपूतों की पावन भूमि रही है। वर्ष 1942 में महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन के आह्वान पर देशभक्तों ने तिरंगा फहराने और थाने का घेराव करने का प्रयास किया था।
अंग्रेजी हुकूमत ने आंदोलनकारियों पर अंधाधुंध गोलियां चला दी थीं। इस गोलीकांड में धमदाहा के 15 वीर सपूत शहीद हो गए थे। वहीं रूपौली और बनमनखी में भी पांच-पांच स्वतंत्रता सेनानियों ने उसी दिन देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए थे।
2023 में मिला राजकीय समारोह का दर्जा
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ हुई। मंत्री ने बताया कि स्थानीय स्तर पर पहले भी जनसहयोग से शहीद दिवस मनाया जाता था। वीर शहीदों के सर्वोच्च बलिदान को राज्यस्तरीय पहचान देने के लिए वर्ष 2023 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे राजकीय समारोह के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
राजकीय समारोह का दर्जा मिलने के बाद मंगलवार को लगातार चौथे वर्ष पूरे प्रशासनिक और राजकीय सम्मान के साथ शहीद दिवस मनाया गया।
आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देने का संदेश
मंत्री लेशी सिंह ने कहा कि शहीदों के त्याग और बलिदान को हमेशा याद रखना समाज की जिम्मेदारी है। राजकीय समारोह का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और सर्वोच्च बलिदान से प्रेरणा देना है।