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Wednesday, August 5, 2026

BIHAR:कोर्ट में फर्जी MTS बनकर ट्रेनिंग ले रहे दो युवक गिरफ्तार, एपीपी भी अरेस्ट; नौकरी के नाम पर बड़े गिरोह की जांच शुरू

हेडलाइन:
दरभंगा कोर्ट में फर्जी MTS बनकर ट्रेनिंग ले रहे दो युवक गिरफ्तार, एपीपी भी अरेस्ट; नौकरी के नाम पर बड़े गिरोह की जांच शुरू

दरभंगा: दरभंगा व्यवहार न्यायालय में फर्जी पहचान पत्र के सहारे खुद को मल्टी टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) बताकर लंबे समय से प्रशिक्षण ले रहे दो युवकों का भंडाफोड़ हुआ है। लहेरियासराय थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के साथ उन्हें प्रशिक्षण देने वाले एडिशनल पब्लिक प्रोसिक्यूटर (एपीपी) अशोक कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को आशंका है कि नौकरी दिलाने के नाम पर सक्रिय किसी संगठित गिरोह का यह पूरा खेल है।

पुलिस ने इस मामले में एपीपी समेत सात नामजद और फर्जी आई-कार्ड तैयार करने वाले अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, 3 अगस्त को सूचना मिली थी कि दो व्यक्ति फर्जी पहचान पत्र के साथ दरभंगा सिविल कोर्ट में एमटीएस के रूप में प्रशिक्षण ले रहे हैं। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। उनकी पहचान बहेड़ी के तुर्की निवासी विकास कुमार यादव और सदर थाना क्षेत्र के तेलहन लक्ष्मीपुर निवासी मनोज कुमार के रूप में हुई। दोनों के पास सिविल कोर्ट के नाम से जारी फर्जी आई-कार्ड मिले।

पूछताछ में दोनों ने बताया कि नौकरी दिलाने के नाम पर उनकी मुलाकात देव, नईमुद्दीन और अजय उर्फ अमन से हुई थी। इन्हीं लोगों ने फर्जी आई-कार्ड उपलब्ध कराए और न्यायालय में एमटीएस के रूप में प्रशिक्षण की व्यवस्था कराई। दोनों युवक 23 जून 2024 से कोर्ट के विभिन्न कक्षों में प्रशिक्षण ले रहे थे।

वहीं, एपीपी अशोक कुमार ने पुलिस को बताया कि किसी व्यक्ति के फोन पर उन्होंने दोनों युवकों को अदालत की कार्यप्रणाली और दस्तावेजों से संबंधित प्रशिक्षण देना शुरू किया था। पुलिस ने बिना सत्यापन के प्रशिक्षण देने को गंभीर लापरवाही मानते हुए उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया।

जांच के दौरान नियुक्ति पत्र, जॉइनिंग लेटर और अन्य दस्तावेज मांगे गए, लेकिन आरोपी कोई वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सके। कोर्ट प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) से सत्यापन कराने पर पता चला कि आई-कार्ड पूरी तरह फर्जी हैं। इतना ही नहीं, आई-कार्ड पर अंकित जारीकर्ता का पद भी न्यायालय में अस्तित्व में नहीं है। पुलिस को संदेह है कि डीएलएसए सचिव के हस्ताक्षर स्कैन कर फर्जी पहचान पत्र तैयार किए गए।

पुलिस ने आरोपियों के पास से फर्जी आई-कार्ड और मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं। मामले में देव, नईमुद्दीन, अजय उर्फ अमन, फर्जी आई-कार्ड बनाने वाले दुकानदार और अन्य अज्ञात लोगों को भी नामजद किया गया है।

कमतौल एसडीपीओ एसके सुमन ने बताया कि लहेरियासराय थाना कांड संख्या 450/26 दर्ज कर पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच में जिन लोगों की संलिप्तता सामने आएगी, उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या यह मामला न्यायालय की सुरक्षा और गोपनीय दस्तावेजों तक अवैध पहुंच बनाने वाले किसी बड़े गिरोह से जुड़ा है।