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Saturday, August 8, 2026

मधेपुरा में मिड-डे मील पर सवाल: खिचड़ी खाने के बाद 60 बच्चे बीमार, थाली में मरी छिपकली मिलने का दावा

मधेपुरा में मिड-डे मील पर सवाल: खिचड़ी खाने के बाद 60 बच्चे बीमार, थाली में मरी छिपकली मिलने का दावा

मधेपुरा के गम्हरिया प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय दाहा में शनिवार को मध्याह्न भोजन खाने के बाद करीब 60 बच्चों की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। बच्चों ने खिचड़ी खाने के बाद पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत की। कुछ बच्चों ने भोजन की थाली में मरी हुई छिपकली मिलने का भी दावा किया है।

तबीयत बिगड़ने के बाद परिजन बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) गम्हरिया लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार फिलहाल सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं और उनकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है।

बच्चों और अभिभावकों का आरोप है कि भोजन में छिपकली मिलने की जानकारी स्कूल की प्रभारी प्रधानाध्यापिका और रसोइया को दी गई थी। आरोप है कि बच्चों को इस बारे में किसी से नहीं बताने के लिए डांटा गया और बची हुई खिचड़ी फेंक दी गई। इसके बाद स्कूल में छुट्टी कर शिक्षक मुख्य गेट पर ताला लगाकर चले गए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और अभिभावक आक्रोशित हो गए। उन्होंने बैजनाथपुर-लिटियाही मुख्य सड़क को कुछ देर जाम कर प्रदर्शन किया और मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता की जांच के साथ दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।

वहीं, प्रभारी प्रधानाध्यापिका किरण कुमारी ने बताया कि शनिवार दोपहर बच्चों को खिचड़ी परोसी गई थी। बच्चे भोजन करने के बाद अपने-अपने घर चले गए थे। घर पहुंचने के बाद कुछ बच्चों ने पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत की।

मामले को गंभीरता से लेते हुए डीपीओ रवि शास्त्री ने जांच का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि बच्चों का इलाज कराया गया है और सभी की स्थिति सामान्य है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि गम्हरिया प्रखंड में मध्याह्न भोजन को लेकर यह हाल की दूसरी घटना है। इससे पहले 18 जुलाई को उत्क्रमित मध्य विद्यालय जागीर टोला में कथित फूड पॉइजनिंग के बाद 48 बच्चे बीमार पड़े थे। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने स्कूलों में मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।