Kosi Live-कोशी लाइव खगड़िया: 'पिताजी भूखे मर गए, घर में खाने को कुछ नहीं था', 48 घंटे घर में पड़ा रहा शव, चंदे से हुआ अंतिम संस्कार - Kosi Live-कोशी लाइव

KOSILIVE BREAKING NEWS

Sunday, July 26, 2026

खगड़िया: 'पिताजी भूखे मर गए, घर में खाने को कुछ नहीं था', 48 घंटे घर में पड़ा रहा शव, चंदे से हुआ अंतिम संस्कार

खगड़िया ग्राउंड रिपोर्ट: 'पिताजी भूखे मर गए, घर में खाने को कुछ नहीं था', 48 घंटे घर में पड़ा रहा शव, चंदे से हुआ अंतिम संस्कार

खगड़िया: बिहार के खगड़िया जिले से इंसानियत को झकझोर देने वाली एक दर्दनाक घटना सामने आई है। सदर प्रखंड के रामचंद्रा वार्ड संख्या-5 निवासी 55 वर्षीय मन्नू साह की मौत के बाद उनका शव करीब 48 घंटे तक घर में पड़ा रहा। परिवार का आरोप है कि घर में खाने के लिए राशन तक नहीं था और आर्थिक तंगी के बीच उनकी मौत हो गई। बाद में स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की मदद से चंदा जुटाकर उनका अंतिम संस्कार कराया गया।

'पिताजी भूखे मर गए, घर में खाने को कुछ नहीं था'

मृतक की बेटी, जो उत्तर प्रदेश के बरेली में रहती हैं, पिता की मौत की खबर मिलने पर खगड़िया पहुंचीं। उन्होंने बताया कि उनके पिता कई दिनों से बेहद परेशान थे। घर में खाने के लिए कुछ भी नहीं था। घटना वाले दिन उनकी मां राशन लाने अपनी बहन के घर गई थीं। जब वह वापस लौटीं तो मन्नू साह खाट पर मृत पड़े थे।

बेटी का कहना है कि उन्होंने आसपास के लोगों से पिता को देखने और जांचने की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उनके शरीर को छूने तक की हिम्मत नहीं दिखाई। बाद में शव से दुर्गंध आने लगी, तब अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई।

48 घंटे तक घर में पड़ा रहा शव

स्थानीय ग्रामीण अमित ने बताया कि मन्नू साह की मौत के बाद उनका शव लगभग दो दिनों तक घर में ही पड़ा रहा। बाद में मोहल्ले के लोगों और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से अंतिम संस्कार कराया गया।

बेगूसराय से खगड़िया आकर बसाया था घर

ग्रामीणों के अनुसार मन्नू साह मूल रूप से बेगूसराय जिले के मथुरापुर के रहने वाले थे। बचपन में मां का निधन हो गया था और नदी कटाव में उनकी जमीन भी बह गई थी। इसके बाद वह रोजी-रोटी की तलाश में खगड़िया आ गए और मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने लगे।

पहली पत्नी हेमलता से उनकी शादी हुई थी, लेकिन संतान नहीं होने के कारण दोनों अलग हो गए। बाद में उन्होंने अनीता देवी से दूसरी शादी की, जिनसे दो बेटे और दो बेटियां हैं। दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है, जबकि दोनों बेटे बेंगलुरु में मजदूरी करते हैं।

लिवर की बीमारी और गरीबी ने तोड़ दी कमर

पत्नी अनीता देवी ने बताया कि मन्नू साह पिछले करीब डेढ़ साल से लिवर की बीमारी से पीड़ित थे। बीमारी के कारण वह मजदूरी नहीं कर पा रहे थे। आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि इलाज कराना भी संभव नहीं था। बेटों की कमाई से भी परिवार का खर्च नहीं चल पा रहा था। दोनों बेटे कभी-कभार दो से चार हजार रुपये भेज देते थे, जिससे किसी तरह घर चलता था।

26 साल से किराए की जमीन पर रह रहा परिवार

अनीता देवी ने बताया कि उनका परिवार पिछले 26 वर्षों से दूसरे की जमीन पर बना एक कच्चा घर में रह रहा है। इसके लिए हर साल दो हजार रुपये किराया देना पड़ता है। पति के बीमार पड़ने के बाद परिवार के सामने भोजन तक का संकट खड़ा हो गया था।

पड़ोसियों ने बताया अंतिम संस्कार में देरी की वजह

हालांकि पड़ोसियों का कहना है कि अंतिम संस्कार में देरी केवल आर्थिक तंगी की वजह से नहीं हुई। पड़ोसी सरिता और बादल कुमार के अनुसार, मोहल्ले के लोग चंदा जुटाकर तुरंत अंतिम संस्कार कराने को तैयार थे, लेकिन परिवार पहले बेटी और फिर बेंगलुरु से बेटों के आने का इंतजार कर रहा था। इसी कारण अंतिम संस्कार में देरी हुई। बाद में शव से दुर्गंध आने पर स्थानीय लोग, वार्ड पार्षद और नगर परिषद के प्रतिनिधि पहुंचे और अंतिम संस्कार कराया गया।

नगर परिषद ने दी आर्थिक सहायता

नगर सभापति प्रतिनिधि ज्योतिष मिश्रा ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने अपने निजी कोष से परिवार की आर्थिक मदद की। इसके अलावा नगर परिषद की ओर से 15 हजार रुपये की सहायता भी उपलब्ध कराई गई। उन्होंने कहा कि मृतक का नाम स्थानीय मतदाता सूची में दर्ज नहीं था, इसलिए उन्हें कई सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका। अब जिला प्रशासन को प्रस्ताव भेजकर परिवार को सरकारी सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

मौत के कारण पर स्थिति स्पष्ट नहीं

परिवार ने आर्थिक तंगी और भोजन की कमी के बीच मौत होने का दावा किया है, जबकि मृतक लंबे समय से लिवर की गंभीर बीमारी से भी पीड़ित थे। ऐसे में मृत्यु का वास्तविक कारण प्रशासनिक या चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल यह घटना गरीबी, बीमारी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से वंचित रहने की गंभीर तस्वीर सामने लाती है।