पूर्णिया से रिपोर्ट:
पूर्णिया रेंज के विवेकानंद ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए धमदाहा थाना में पदस्थापित रहे दारोगा पवन कुमार चौधरी को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया है। वर्तमान में वह कटिहार जिला बल में पदस्थापित थे। उन पर छापेमारी के दौरान जब्त नकदी को सरकारी अभिरक्षा में जमा कराने के बजाय निजी लाभ के लिए अपने पास रखने का गंभीर आरोप था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, धमदाहा थाना में पदस्थापन के दौरान पवन कुमार चौधरी ने एक छापेमारी की थी। आरोप है कि छापेमारी के दौरान जब्त प्रदर्श के साथ बरामद नकदी को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कर जमा कराने के बजाय उन्होंने उसे अपने पास रख लिया। इतना ही नहीं, पूरे मामले में गंभीर अनियमितता भी बरती गई।
जांच में यह भी सामने आया कि छापेमारी के बाद तत्काल कानूनी कार्रवाई करने के बजाय चार दिनों की देरी से प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई गई। पुलिस विभाग ने इसे कर्तव्य में घोर लापरवाही और विभागीय नियमों का गंभीर उल्लंघन माना।
मामले की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूर्णिया के पुलिस अधीक्षक ने पवन कुमार चौधरी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का प्रस्ताव भेजा था। मामले की समीक्षा के बाद आईजी विवेकानंद ने एसपी की अनुशंसा से सहमति जताई और आरोपों को अत्यंत गंभीर मानते हुए तत्काल प्रभाव से उन्हें पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया।
2024 का है मामला
गौरतलब है कि यह मामला वर्ष 2024 का है। उस समय पवन कुमार चौधरी धमदाहा के अपर थानाध्यक्ष थे। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने एक स्मैक तस्कर के घर छापेमारी की थी, जहां स्मैक के साथ तस्कर को गिरफ्तार किया गया था। छापेमारी के दौरान घर से नकदी भी बरामद हुई थी, लेकिन आरोप है कि अपर थानाध्यक्ष ने जब्ती सूची में उस नकदी का उल्लेख नहीं किया।
बाद में गिरफ्तार तस्कर के परिजनों ने इसकी शिकायत तत्कालीन एसपी उपेंद्र नाथ वर्मा से की। इसके बाद जांच की जिम्मेदारी एसडीपीओ को सौंपी गई। जांच में आरोप सही पाए जाने पर तत्कालीन एसपी ने पवन कुमार चौधरी को निलंबित कर दिया था।
आईजी का सख्त संदेश
आईजी विवेकानंद ने स्पष्ट कहा कि पुलिस विभाग में कर्तव्य के निर्वहन में लापरवाही, भ्रष्टाचार या पद के दुरुपयोग के मामलों में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के विरुद्ध आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।