Kosi Live-कोशी लाइव MADHEPURA:80 साल के रघु मंडल का अद्भुत संकल्प: कचरे से ईंटें चुनकर बना रहे हनुमान मंदिर - Kosi Live-कोशी लाइव

KOSILIVE BREAKING NEWS

Thursday, June 11, 2026

MADHEPURA:80 साल के रघु मंडल का अद्भुत संकल्प: कचरे से ईंटें चुनकर बना रहे हनुमान मंदिर

हेडलाइन:
80 साल के रघु मंडल का अद्भुत संकल्प: कचरे से ईंटें चुनकर बना रहे हनुमान मंदिर

"उदाकिशुनगंज (मधेपुरा)। उम्र 80 साल, आर्थिक स्थिति कमजोर और स्वास्थ्य भी साथ नहीं दे रहा, लेकिन आस्था और संकल्प ऐसा कि हर कोई उनकी मिसाल दे रहा है। उदाकिशुनगंज नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या-6 डोहटबारी निवासी रघु मंडल पिछले एक वर्ष से सड़क, गली और सार्वजनिक स्थानों पर फेंकी गई ईंटों को चुन-चुनकर जमा कर रहे हैं। उनका सपना है कि वे एक भव्य हनुमान मंदिर का निर्माण कर सकें।

शुरुआत में जब लोग उनसे पूछते थे कि वे ईंटें क्यों जमा कर रहे हैं, तो उनका एक ही जवाब होता था—"मंदिर बनाऊंगा।" लोगों को उनकी बात पर यकीन नहीं होता था, लेकिन जब धीरे-धीरे ईंटों की दीवार खड़ी होने लगी, तब सबको उनके संकल्प का अहसास हुआ।

पटेल चौक से डोहटबारी जाने वाली सड़क पर कला भवन के पीछे स्थित एक पीपल के पेड़ के समीप रघु मंडल मंदिर का निर्माण करा रहे हैं। बताया जाता है कि करीब 30 वर्ष पहले उन्होंने अपने एक मित्र के साथ मिलकर इस पीपल के पौधे को लगाया था, जो आज विशाल वृक्ष बन चुका है।

रघु मंडल पहले रिक्शा चलाकर अपना जीवनयापन करते थे, लेकिन बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य के कारण उन्हें यह काम छोड़ना पड़ा। वर्तमान में वे पेंशन के सहारे जीवन गुजार रहे हैं। इसी पेंशन में से कुछ पैसे बचाकर मंदिर निर्माण में लगा रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने लोगों से थोड़ी-थोड़ी बालू और सीमेंट भी जुटाई तथा राजमिस्त्री को मेहनताना देकर मंदिर की दीवार खड़ी करवा दी।

हालांकि मंदिर का निर्माण कार्य अभी अधूरा है और छत की ढलाई बाकी है, लेकिन रघु मंडल का हौसला कम नहीं हुआ है। वे उम्मीद कर रहे हैं कि लोगों के सहयोग से जल्द ही मंदिर का निर्माण पूरा हो जाएगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आर्थिक तंगी और बीमारी के बावजूद जिस लगन और श्रद्धा के साथ रघु मंडल मंदिर निर्माण में जुटे हैं, वह समाज के लिए प्रेरणादायक है। प्राइवेट शिक्षक प्रभाष यादव ने कहा कि रघु मंडल का समर्पण युवाओं के लिए एक सीख है कि दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

ग्रामीणों का मानना है कि जिस उम्र में लोग आराम करना पसंद करते हैं, उस उम्र में रघु मंडल समाज और धर्म के लिए एक अनुकरणीय कार्य कर रहे हैं। उनका यह प्रयास श्रद्धा, मेहनत और अटूट संकल्प का जीवंत उदाहरण बन गया है। :::