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Saturday, June 13, 2026

अरार थानाध्यक्ष ज्ञानानंद अमरेंद्र को नम आंखों से अंतिम विदाई: पैतृक गांव पहुंचते ही मचा कोहराम, मां बोलीं— जाने की उम्र मेरी थी

अरार थानाध्यक्ष ज्ञानानंद अमरेंद्र को नम आंखों से अंतिम विदाई: पैतृक गांव पहुंचते ही मचा कोहराम, मां बोलीं— जाने की उम्र मेरी थी
कटिहार/मधेपुरा: Gyananand Amarendra के पार्थिव शरीर के पैतृक गांव पहुंचते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। मधेपुरा जिले के Arar Police Station में पदस्थापित ज्ञानानंद अमरेंद्र का पार्थिव शरीर शुक्रवार शाम करीब 5:30 बजे Azampurgola के धमक टोला स्थित पैतृक घर पहुंचा। शव पहुंचते ही घर के बाहर चीख-पुकार मच गई और माहौल बेहद गमगीन हो गया।
ज्ञानानंद की 80 वर्षीय मां Kaushalya Devi बेटे की मौत से पूरी तरह टूट गईं। वे बार-बार बिलखते हुए कह रही थीं, “जाने की उम्र मेरी थी, मगर वो चला गया। भगवान ये क्या कर दिए।”
वहीं पिता Yogendra Kumar Yadav पुत्र वियोग में बार-बार बेसुध हो जा रहे थे। परिजनों को संभालना मुश्किल हो रहा था।
गांव में ज्ञानानंद को उनके घर के नाम “डब्बू” से जाना जाता था। हर व्यक्ति उन्हें एक सरल, मिलनसार और मददगार इंसान के रूप में याद कर रहा था। शुक्रवार रात पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
बहन बोलीं— दो दिन पहले वीडियो कॉल पर हुई थी बात
भाई की मौत से बहन Sulekha Devi का रो-रोकर बुरा हाल था। वे बार-बार फफक पड़ रही थीं। बिलखते हुए उन्होंने कहा,
“परसों ही वीडियो कॉल पर बात हुई थी। कह रहे थे, दीदी अभी मत जाइए, हम जल्द ही घर आने वाले हैं। अब किसका इंतजार करेंगे?”
बहन की यह बात सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। पूरे घर में मातम पसरा रहा और परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था।
परिवार के सदस्य Sunil Kumar Yadav ने बताया कि ज्ञानानंद फरवरी के पहले सप्ताह में गांव आए थे। उन्होंने कुछ दिन परिवार के साथ बिताए और इसी दौरान परिवार के एक विवाह समारोह में भी शामिल हुए थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि वे पल उनकी आखिरी याद बन जाएंगे।
चाचा Niranjan Kumar Yadav ने भावुक होकर कहा, “हमारे परिवार का कोहिनूर हीरा चला गया। उसकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती।”
RPF से शुरू हुआ सफर, पुलिस सेवा में बनाई अलग पहचान
ग्रामीणों के अनुसार, ज्ञानानंद अमरेंद्र बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी और अनुशासित छात्र थे। उनके मित्र Abhishek Gupta ने बताया कि उन्होंने BPSC High School से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक परीक्षा पास की थी।
अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने सेवा क्षेत्र में अलग पहचान बनाई। पुलिस विभाग में आने से पहले वे Railway Protection Force (RPF) में कार्यरत थे। बाद में उन्होंने पुलिस सेवा में सब-इंस्पेक्टर के रूप में योगदान दिया।
ज्ञानानंद 2009 बैच के सब-इंस्पेक्टर थे और अपनी कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और सौम्य व्यवहार के लिए जाने जाते थे। सहकर्मियों और ग्रामीणों के बीच उनकी छवि एक जिम्मेदार और संवेदनशील अधिकारी की थी।
कटिहार में रहता है परिवार
ज्ञानानंद अमरेंद्र की पत्नी Anima Kumari और उनका इकलौता पुत्र Harsh Kumar Katihar में रहते हैं। हर्ष वहीं पढ़ाई करता है। गर्मी की छुट्टियों के कारण वह इन दिनों मधेपुरा आया हुआ था।
उनके बड़े भाई Umanand Kumar कटिहार में शिक्षक हैं। ज्ञानानंद के निधन के बाद धमक टोला स्थित पैतृक घर में शोक का माहौल है। परिजनों और ग्रामीणों के बीच अब उनकी यादें ही शेष रह गई हैं।
उनकी असामयिक मृत्यु ने न केवल परिवार बल्कि पूरे पुलिस महकमे और इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया