भरत तिवारी एनकाउंटर केस में NHRC की एंट्री, पिता-भाई समेत 14 पर FIR दर्ज
भोजपुर। भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर केस ने अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। मुठभेड़ में भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अब इस प्रकरण में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की एंट्री हो गई है, जिससे पुलिस की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने इस पूरे मामले को NHRC के समक्ष उठाते हुए स्वतंत्र एजेंसी या CBI जांच की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मानसिक रूप से अस्वस्थ बताए जा रहे युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई, जिससे पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
NHRC में शिकायत से बढ़ी पुलिस की मुश्किल
मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंचने के बाद अब निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। शिकायतकर्ता ने इसे संदिग्ध मौत करार देते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
मुठभेड़ और फायरिंग को लेकर दो अलग-अलग केस दर्ज
इधर पुलिस ने भी मामले में अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस द्वारा दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। पहली प्राथमिकी मुठभेड़ को लेकर मृतक भरत भूषण तिवारी के खिलाफ दर्ज की गई है, जबकि दूसरी प्राथमिकी पुलिस पर फायरिंग और सहयोग के आरोप में उसके पिता काशी नाथ तिवारी, भाई चंदन तिवारी समेत कुल 14 लोगों को नामजद करते हुए दर्ज की गई है।
पुलिस के मुताबिक, भरत भूषण तिवारी के पास अवैध हथियार होने की गुप्त सूचना मिली थी। इसी सूचना के आधार पर 17 जून की सुबह पुलिस टीम उसके घर पहुंची थी।
दरवाजा खुलते ही पुलिस पर तान दी पिस्टल
प्राथमिकी के अनुसार, सुबह करीब 5:10 बजे पुलिस ने घर की घेराबंदी कर दरवाजा खुलवाया। आरोप है कि दरवाजा खुलते ही भरत भूषण तिवारी आक्रामक हो गया और हाथ में पिस्टल लेकर थानाध्यक्ष पर हमला करने की कोशिश की।
स्थिति को भांपते हुए पुलिसकर्मी पीछे हट गए। इसके बाद भरत घर की छत पर चढ़ गया और पुलिस टीम पर कई राउंड फायरिंग की। पुलिस का दावा है कि इस दौरान जवान बाल-बाल बच गए। जब भी पुलिस टीम उसके करीब पहुंचने की कोशिश करती, वह लगातार फायरिंग करता रहा।
पुलिस का दावा—परिजनों ने दिया संरक्षण
पुलिस का आरोप है कि मुठभेड़ के दौरान जब भरत के पिता और भाई से हथियार के बारे में पूछताछ की गई, तो उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। प्राथमिकी में कहा गया है कि दोनों को अवैध हथियार की जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने पुलिस को सूचना नहीं दी और उसे संरक्षण देते रहे।
इसी आधार पर पिता और भाई के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि घटना में अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।
सरेंडर का नाटक कर पुलिस को छकाता रहा
पुलिस के अनुसार, एसटीएफ और शाहपुर पुलिस ने बाद में भरत को बधार इलाके में चारों ओर से घेर लिया। उसे कई बार आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया, लेकिन उसने कथित तौर पर चालाकी शुरू कर दी।
प्राथमिकी के मुताबिक, वह आत्मसमर्पण का दिखावा करते हुए अपनी पिस्टल कुछ दूरी पर फेंक देता था। जैसे ही पुलिस हथियार जब्त करने के लिए आगे बढ़ती, वह तेजी से वापस पिस्टल उठा लेता और फिर पुलिस पर फायरिंग शुरू कर देता।
अब जांच पर टिकी सबकी नजर
एनकाउंटर को लेकर जहां एक तरफ पुलिस अपनी कार्रवाई को जायज बता रही है, वहीं दूसरी ओर परिवार और मानवाधिकार कार्यकर्ता इसे संदिग्ध बता रहे हैं। अब NHRC में शिकायत दर्ज होने के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। सबकी नजर अब इस बात पर टिकी है कि आयोग इस मामले में क्या रुख अपनाता है और आगे जांच किस दिशा में जाती है।