Bharat Tiwari Encounter: भरत तिवारी एनकाउंटर की होगी न्यायिक जांच, CM सम्राट चौधरी का बड़ा फैसला
पटना/आरा। आरा के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले की न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया है। इस जांच की जिम्मेदारी पटना हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायिक जांच का उद्देश्य घटना के हर पहलू की निष्पक्ष और पारदर्शी पड़ताल सुनिश्चित करना है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
एनकाउंटर के बाद दर्ज हुईं दो FIR
भरत तिवारी मुठभेड़ मामले में पुलिस ने दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं। पहली FIR में अवैध हथियार रखने, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, पुलिस पर फायरिंग करने और आरोपी को संरक्षण देने के आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में भरत के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को नामजद किया गया है।
दूसरी प्राथमिकी सीधे पुलिस मुठभेड़ से संबंधित है। वहीं भरत की मां आशा देवी ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने जगदीशपुर डीएसपी और शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए आवेदन दिया है। उनका आरोप है कि सरेंडर करने के बाद उनके बेटे को गोली मारी गई। हालांकि पुलिस ने अब तक इस आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
हाईकोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग
पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता रजनीश कुमार ने भी इस मुठभेड़ पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई और स्वतंत्र SIT जांच की मांग की है। साथ ही हाईकोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की अपील भी की है।
पुलिस का दावा—फायरिंग कर रहा था भरत
पुलिस के अनुसार, 16 जून को मिली सूचना के आधार पर 17 जून की सुबह भरत तिवारी की गिरफ्तारी और अवैध हथियार बरामद करने के लिए टीम उसके गांव पहुंची थी। एफआईआर में दावा किया गया है कि पुलिस को देखते ही भरत उग्र हो गया और पिस्टल से फायर करने की कोशिश की।
पुलिस का कहना है कि भरत घर की छत पर चढ़ गया और पुलिस टीम पर कई राउंड फायरिंग की। बाद में वह हथियार लेकर बधार की ओर भागा और लगातार गोली चलाता रहा। पुलिस का दावा है कि कई बार आत्मसमर्पण की चेतावनी देने के बावजूद उसने फायरिंग नहीं रोकी।
मुठभेड़ में लगी गोली, अस्पताल में हुई मौत
पुलिस के मुताबिक, आत्मरक्षा में जवानों ने फायरिंग की। इस दौरान भरत के पैर में गोली लगी और वह घायल होकर गिर पड़ा। उसे तुरंत शाहपुर रेफरल अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटनास्थल से पुलिस ने एक देसी पिस्टल, मैगजीन, दो जिंदा कारतूस और दो खोखे बरामद होने का दावा किया है। एफआईआर के अनुसार, भरत ने 10 से 12 राउंड फायरिंग की, जबकि पुलिस ने आत्मरक्षा में 5 राउंड गोली चलाई।
अब न्यायिक जांच के आदेश के बाद पूरे मामले पर सबकी नजर टिकी है कि जांच में क्या सच्चाई सामने आती है।