1. एसवीयू ने ठेकेदार रिशु श्री को टेंडर हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया।
2. मीठापुर स्थित फ्लैट पर छापेमारी में 2 करोड़ के जेवर और 2.5 लाख नकद बरामद।
3. कई अफसरों और इंजीनियरों की भूमिका जांच के दायरे में, बड़े खुलासों के संकेत।
बिहार में सरकारी टेंडरों में कथित हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ठेकेदार रिशु श्री को गिरफ्तार कर लिया है। एसवीयू की टीम देर रात पटना के मीठापुर स्थित उनके आवास पहुंची और उन्हें पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। बाद में एसवीयू कार्यालय में देर रात तक उनसे पूछताछ की गई।
जांच एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, अब तक मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर रिशु श्री से लगातार पूछताछ जारी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
11 घंटे चली छापेमारी, करोड़ों के जेवर बरामद
इससे पहले बुधवार सुबह एसवीयू की टीम ने पटना के मीठापुर स्थित कामत रामसखी इंक्लेव के फ्लैट नंबर-5A में छापेमारी की थी। करीब 11 घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन में टीम ने लगभग 2 करोड़ रुपये के जेवरात और 2.5 लाख रुपये नकद बरामद किए।
इसके अलावा छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, संपत्ति से जुड़े कागजात और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए। जांच एजेंसियां इन दस्तावेजों की मदद से वित्तीय लेनदेन और सरकारी ठेकों से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।
टेंडर फिक्सिंग कर कंपनी को पहुंचाया लाभ
एसवीयू की यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत दर्ज मामले में की गई है। एजेंसी को संदेह है कि रिशु श्री ने सरकारी विभागों में टेंडर फिक्सिंग कर अपनी कंपनी “रिलायबल इंफ्रा सर्विसेस” को फायदा पहुंचाया।
जांच में यह भी सामने आया है कि उन्होंने कई वरिष्ठ अधिकारियों और विभागीय इंजीनियरों के साथ सांठगांठ कर सरकारी परियोजनाओं में प्रभाव बनाया। एजेंसियों का मानना है कि यह केवल व्यक्तिगत संपर्कों का मामला नहीं, बल्कि सरकारी टेंडरों में संगठित तरीके से हेराफेरी करने की रणनीति का हिस्सा था।
आईएएस अधिकारियों से संबंधों की भी जांच
सूत्रों के अनुसार, रिशु श्री के बिहार के कई बड़े नौकरशाहों, इंजीनियरों और राजनीतिक हस्तियों से करीबी संबंध रहे हैं। विशेष रूप से वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस के साथ उनके संबंधों की जांच पहले से चल रही है।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि फर्जी कंपनियों और संदिग्ध लेनदेन के जरिए बड़े पैमाने पर धन का हेरफेर किया गया। यदि पूछताछ में मिले इनपुट और दस्तावेज मजबूत साबित होते हैं, तो आने वाले दिनों में कई अधिकारियों और विभागीय कर्मियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
हाल ही में पटना हाईकोर्ट ने रिशु श्री की क्रिमिनल रिट याचिका खारिज कर दी थी। उन्होंने सरकारी टेंडरों की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राहत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने जांच एजेंसियों की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही एसवीयू और अन्य जांच एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी। फिलहाल जांच एजेंसियां रिशु श्री के वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और अफसरों से जुड़े नेटवर्क की परत-दर-परत जांच में जुटी हुई हैं।