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Sunday, May 10, 2026

SUPAUL:सुपौल की शिक्षिका का कमाल, अब कुमार सानू की आवाज में गूंजेगा उनका लिखा गीत, पूरे जिले में खुशी की लहर

सुपौल की शिक्षिका का कमाल: अब कुमार सानू की आवाज में गूंजेगा कल्याणी स्वरूपा का देशभक्ति गीत
15 अगस्त पर रिलीज होगा गीत, छोटे शहर की शिक्षिका ने बनाई राष्ट्रीय पहचान
सुपौल जिले से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि प्रतिभा और मेहनत के दम पर छोटे शहरों से निकलकर भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है। सुपौल नगर परिषद वार्ड संख्या-13 निवासी एवं मध्य विद्यालय चकडुमरिया में कार्यरत शिक्षिका कल्याणी स्वरूपा की लिखी देशभक्ति रचना अब मशहूर पार्श्व गायक Kumar Sanu की आवाज में पूरे देश में गूंजने जा रही है।
आगामी 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उनका लिखा देशभक्ति गीत रिलीज किया जाएगा। इस खबर के सामने आने के बाद पूरे सुपौल जिले में खुशी और गर्व का माहौल है। शिक्षा जगत, साहित्य प्रेमियों और संगीत प्रेमियों के बीच इस उपलब्धि को ऐतिहासिक माना जा रहा है।
“जब कभी हम अपना तिरंगा लहराएंगे…”
कल्याणी स्वरूपा की रचनात्मक यात्रा कई वर्षों पुरानी है। पेशे से शिक्षिका होने के बावजूद उन्होंने अपने भीतर की लेखिका और गीतकार को हमेशा जीवित रखा। उनकी पुस्तक “अंदाज जिंदगी के” में कुल 14 देशभक्ति गीत शामिल हैं। इन्हीं में से एक गीत —
“जब कभी हम अपना तिरंगा लहराएंगे, सीमा से जो न लौटे वह शहीद याद आएंगे”
— को चयनित किया गया है, जिसे अब कुमार सानू ने अपनी आवाज दी है।
बताया गया कि इस गीत की रिकॉर्डिंग 1 मई 2026 को पूरी कर ली गई है। स्वतंत्रता दिवस से करीब 15 दिन पहले इसे आधिकारिक रूप से रिलीज किया जाएगा। यह गीत शहीदों के बलिदान और राष्ट्रप्रेम की भावना को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास करेगा।
फेसबुक पोस्ट से शुरू हुआ सफर
कल्याणी स्वरूपा ने बताया कि उनकी सफलता की शुरुआत एक फेसबुक पोस्ट से हुई। उन्होंने अपनी रचनाओं से जुड़ा एक पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा किया था। इसी पोस्ट को देखने के बाद कुमार सानू की म्यूजिक कंपनी की डायरेक्टर पिट्टू कुमारी ने उनसे संपर्क किया।
धीरे-धीरे बातचीत आगे बढ़ी और उन्हें मुंबई बुलाया गया। वहां उनकी मुलाकात खुद कुमार सानू से हुई। इस पल को याद करते हुए कल्याणी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि बचपन से उनका सपना था कि उनके लिखे गीत किसी बड़े गायक की आवाज में गाए जाएं और फिल्मों में इस्तेमाल हों। अब उनका यह सपना धीरे-धीरे सच होता नजर आ रहा है।
बचपन का शौक बना जुनून
कल्याणी ने बताया कि उन्हें बचपन से ही लिखने का शौक था। छोटी उम्र में ही वे कविताएं और गीत लिखा करती थीं। हालांकि उस समय उन्हें अपने लिखे कागज संभालकर रखना नहीं आता था, लेकिन उनकी मां उन रचनाओं को सहेजकर रखती थीं।
समय के साथ यही शौक उनका जुनून बन गया। स्कूल की नौकरी, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने लेखन को कभी नहीं छोड़ा। वे लगातार लिखती रहीं और आज उसी मेहनत का परिणाम पूरे देश के सामने आने वाला है।
“यह तो सिर्फ शुरुआत है”
कल्याणी की बचपन की सहेली और उच्च माध्यमिक विद्यालय बलुआ की प्रिंसिपल डॉ. अर्चना कुमारी ने उनकी सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि कल्याणी बचपन से ही कुछ अलग करने का सपना देखती थीं।
उन्होंने कहा कि उनके गीतों में भावनाओं की गहराई और शब्दों का प्रभाव हमेशा दिखाई देता था। आज उनकी रचना राष्ट्रीय मंच तक पहुंच रही है, यह केवल शुरुआत है। उन्होंने रामायण की चौपाई का उल्लेख करते हुए कहा—
“जेहि के जेहि पर सत्य सनेहू, सो तेहि मिलै न कछु संदेहू।”
छात्रों और शिक्षकों में खुशी का माहौल
कल्याणी स्वरूपा की इस उपलब्धि को लेकर स्थानीय शिक्षकों और छात्रों में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है। कई शिक्षकों ने कहा कि सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षक केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं।
छात्रों ने भी अपनी शिक्षिका की सफलता पर गर्व जताया। बच्चों ने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनकी मैडम का लिखा गीत अब पूरा देश सुनेगा। इससे छात्रों के भीतर भी अपने सपनों को पूरा करने का आत्मविश्वास बढ़ा है।
छोटे शहर से राष्ट्रीय मंच तक का सफर
सुपौल जैसे छोटे जिले से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना आसान नहीं होता। सीमित संसाधनों और व्यस्त दिनचर्या के बीच अपनी प्रतिभा को निखारना किसी चुनौती से कम नहीं है। कल्याणी रोज स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के बाद अपने लेखन के लिए समय निकालती थीं। कई बार वे देर रात तक गीतों और कविताओं पर काम करती थीं।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार और सहयोगियों को देते हुए कहा कि अपनों का साथ नहीं मिलता तो शायद वह इस मुकाम तक नहीं पहुंच पातीं।
युवाओं और शिक्षकों के लिए बनी प्रेरणा
कल्याणी स्वरूपा की यह उपलब्धि केवल एक गीत के रिलीज होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन हजारों युवाओं और शिक्षकों के लिए प्रेरणा है, जो अपने भीतर कोई सपना संजोए हुए हैं।
उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर मेहनत सच्ची हो, लगन मजबूत हो और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।
अब पूरे सुपौल जिले को 15 अगस्त का इंतजार है, जब जिले की बेटी की लिखी पंक्तियां कुमार सानू की आवाज में देशभर में गूंजेंगी और हर भारतीय के दिल में देशभक्ति का नया जज्बा जगाएंगी।