NEET फर्जीवाड़ा में बड़ा खुलासा, RJD के राष्ट्रीय सचिव समेत 4 गिरफ्तार
20-30 लाख में MBBS एडमिशन का झांसा, दिल्ली पुलिस ने किया संगठित गिरोह का भंडाफोड़
पटना/नई दिल्ली: NEET-UG 2026 परीक्षा और मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के नाम पर चल रहे बड़े फर्जीवाड़े का दिल्ली पुलिस ने खुलासा किया है। इस मामले में कथित मास्टरमाइंड, राजद के राष्ट्रीय सचिव संतोष कुमार जायसवाल समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि गिरोह मेडिकल कॉलेज में MBBS सीट दिलाने के नाम पर छात्रों और उनके परिवारों से 20 से 30 लाख रुपये तक वसूलने की तैयारी में था।
कौन है संतोष कुमार जायसवाल
गिरफ्तार संतोष कुमार जायसवाल बिहार के मोतिहारी जिले के घोड़ासहन का रहने वाला बताया जा रहा है। वह दिल्ली में दवा कारोबार से जुड़ा है और खुद को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का राष्ट्रीय सचिव बताता था। सोशल मीडिया प्रोफाइल में भी उसने खुद को पार्टी का राष्ट्रीय सचिव लिखा हुआ है। बताया जा रहा है कि वह रक्सौल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार संतोष जायसवाल की पार्टी में अच्छी पकड़ मानी जाती है और उसे कई बड़े नेताओं का करीबी बताया जाता रहा है।
ऐसे हुआ पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा
दिल्ली पुलिस को गुजरात के सूरत से इनपुट मिला था कि दिल्ली में एक गिरोह NEET अभ्यर्थियों को मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने और पेपर उपलब्ध कराने का दावा कर रहा है। इसके बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम सक्रिय हुई और तकनीकी निगरानी के आधार पर महिपालपुर एक्सटेंशन इलाके के 100 से अधिक होटलों में छापेमारी की गई।
जांच के दौरान पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें संतोष कुमार जायसवाल, विनोद भाई भीखा भाई पटेल, संत प्रताप सिंह और डॉ. अखलाक आलम उर्फ गोल्डन आलम शामिल हैं।
छात्रों को परिवार से अलग रखा गया
पुलिस के मुताबिक गिरोह ने कई छात्रों को उनके परिवारों से अलग कर रखा था। कुछ छात्रों को गाजियाबाद के फ्लैट और अस्पताल के आसपास ठहराया गया था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 18 छात्रों को आरोपियों के चंगुल से मुक्त कराया, जिनमें कई नाबालिग भी शामिल थे।
बताया गया कि 3 मई को होने वाली NEET परीक्षा से पहले छात्रों को कथित “स्पेशल प्रश्नपत्र” देने का झांसा दिया गया था। जांच में सामने आया कि तथाकथित प्रश्नपत्र वास्तव में पुराने स्टडी मटेरियल और कोचिंग संस्थानों की सामग्री से तैयार किए गए फर्जी पेपर थे।
मूल सर्टिफिकेट और ब्लैंक चेक भी लेते थे
जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी अभिभावकों से एडवांस राशि के अलावा 10वीं और 12वीं की मूल मार्कशीट, हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक और अन्य जरूरी दस्तावेज भी अपने कब्जे में ले लेते थे।
पुलिस ने छापेमारी के दौरान कथित प्रश्न-उत्तर सामग्री के 149 पन्ने, तीन साइन किए हुए ब्लैंक चेक और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं।
हर कैंडिडेट से 20-30 लाख की डील
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह प्रत्येक उम्मीदवार से 20 से 30 लाख रुपये तक की मांग करता था। आरोपियों द्वारा मेडिकल कॉलेज में सीट की “गारंटी” देने का दावा किया जाता था। पुलिस का कहना है कि गिरोह छात्रों और अभिभावकों की मेडिकल एडमिशन की चिंता का फायदा उठाकर संगठित तरीके से ठगी कर रहा था।
डॉक्टर पर फर्जी प्रश्नपत्र तैयार करने का आरोप
दिल्ली Police के मुताबिक डॉ. अखलाक आलम पर पुराने प्रश्नपत्रों और कोचिंग सामग्री के आधार पर फर्जी प्रश्नपत्र तैयार करने का आरोप है। वहीं संत प्रताप सिंह छात्रों के रहने और अन्य व्यवस्थाओं को संभालता था, जबकि विनोद पटेल बिचौलिये के रूप में परिवारों से संपर्क करता था।
NEET पेपर लीक मामले में CBI की कार्रवाई जारी
इधर NEET पेपर लीक मामले की जांच CBI कर रही है। अब तक पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच एजेंसी राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में छापेमारी और पूछताछ कर रही है।
CBI ने राजस्थान के सीकर से मांगी लाल बिंवाल, दिनेश बिंवाल, विकास बिंवाल, गुरुग्राम निवासी यश यादव और नासिक के शुभम खैरनार को गिरफ्तार किया है। वहीं कई अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है।